‘मांग सत्ता गिराने की नहीं, निष्पक्ष चुनाव की है’, SIR विवाद पर शशि थरूर का रिजिजू को जवाब

HIGHLIGHTS
- थरूर ने कहा कि विपक्ष हिंसा के बजाय शांतिपूर्ण विरोध में विश्वास करता है।
- रिजिजू ने कुछ नेताओं और भारत विरोधी समूहों पर युवाओं को भड़काने का आरोप लगाया था।
- थरूर ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर चिंता जताई।
- कांग्रेस सांसद ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करना हर भारतीय का अधिकार है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की ओर से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर दिए गए बयान को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रतिक्रिया दी है। थरूर ने कहा कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष हिंसा का समर्थन नहीं करता, बल्कि उसकी मांग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की है।
केरलम की राजधानी तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस सांसद थरूर ने कहा कि फ्रांस में बसों और पुलिस थानों को आग लगाने जैसी हिंसक घटनाओं का विपक्ष कभी समर्थन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष शांतिपूर्ण प्रदर्शन में विश्वास रखता है और वह खुद भी इस तरह के प्रदर्शनों में शामिल रहे हैं।
रिजिजू ने युवाओं को भड़काने की साजिश का लगाया था आरोप
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए आरोप लगाया था कि कुछ नेताओं और भारत विरोधी समूहों ने मिलकर देश के युवाओं को भड़काने और सड़कों पर हिंसा फैलाने की कोशिश की। उन्होंने बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाओं और फ्रांस में दंगों, आगजनी व लूटपाट का उल्लेख करते हुए कहा था कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस। रिजिजू ने यह भी कहा था कि भारत में सत्ता परिवर्तन संभव है, लेकिन इसके लिए चुनाव ही रास्ता है।
अपने बयान में रिजिजू ने जॉर्ज सोरोस का भी उल्लेख किया था। उन्होंने एक वीडियो साझा किया था, जिसमें ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण सत्ता परिवर्तन की बात करते हुए दिखाई देते हैं।
मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर थरूर ने जताई चिंता
रिजिजू के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने कहा कि सत्ता परिवर्तन जैसे शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार गिराने की मांग नहीं कर रहा, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की बात कर रहा है।
थरूर ने कहा, "आज चिंता की बात यह है कि एक पूरी तरह समस्याग्रस्त, अनियमित और आंशिक रूप से अवैध प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इसी वजह से हम इन फैसलों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "यह सांविधानिक मुद्दा है। इसका किसी सरकार को गिराने या सत्ता पलटने की कोशिश से कोई संबंध नहीं है। लोकतंत्र किसी का दिया हुआ उपहार नहीं है। देश के आम नागरिक इसके संरक्षक हैं और हर भारतीय को लोकतंत्र की रक्षा करने का अधिकार है।"
चुनाव आयोग की भूमिका पर भी उठाए सवाल
शशि थरूर ने कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं से भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाने की मांग कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष संस्थाओं को चुनौती नहीं दे रहा, बल्कि उनके काम करने के तरीके और आचरण पर सवाल उठा रहा है। थरूर के मुताबिक, यह ऐसा मुद्दा है जिस पर देश के सभी नागरिकों को चिंता करनी चाहिए।
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