सीजेपी के सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ी

HIGHLIGHTS
- पुलिस की मांग पर विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने हिरासत बढ़ाने का फैसला लिया।
- सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
- इसी मामले में अजिंक्य शिंदे से नया बेल बॉन्ड भरवाकर प्रक्रिया पूरी की गई।
दिल्ली की एसईएम अदालत ने सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी है। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने पुलिस की मांग पर यह निर्णय लिया। इससे पहले, दोपहर में हुई सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों की रिहाई पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
हिरासत बढ़ाए जाने पर सीजेपी ने जताई नाराजगी
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की लीगल हेड रत्ना सिंह ने अदालत की कार्रवाई को 'मखौल' बताया। उन्होंने हिरासत बढ़ाने के फैसले को 'अस्पष्ट' और 'मानसिक यातना' करार दिया। रत्ना सिंह के मुताबिक, पिछले छह दिनों से जमानतदार के सत्यापन में देरी या उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने जैसे कारण बताए जा रहे थे। उन्होंने कहा कि इस तरह किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित की जा रही थी।
रत्ना सिंह ने बताया कि दोपहर दो बजे निर्धारित सुनवाई साढ़े तीन बजे शुरू हुई और करीब एक घंटे तक चली। इस दौरान उनके वकीलों ने कानूनी पहलुओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि न्यायिक हिरासत बढ़ाने के लिए कोई ठोस वजह नहीं बताई गई। रत्ना सिंह ने कहा कि पार्टी इस फैसले को चुनौती देगी, क्योंकि उनके अनुसार यह विरोध की आवाजों को दबाने की कोशिश है।
पहले पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए थे दोनों नेता
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) अदालत ने सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने के साथ तिहाड़ जेल भेजने का आदेश दिया था। दोनों पर पहले से निर्धारित बेल बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप है।
वहीं, इसी मामले में शामिल तीसरे नेता अजिंक्य शिंदे को अदालत से राहत मिली। उनसे नया बेल बॉन्ड भरवाकर प्रक्रिया पूरी की गई।
तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पर पहुंचे थे प्रदर्शनकारी
जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाए जाने के बावजूद सीजेपी नेताओं ने वहां विरोध प्रदर्शन किया था। आशुतोष रांका, सौरव दास और पार्टी के अन्य कार्यकर्ता बैरिकेड पार करके अंदर पहुंचे और तिरंगा लहराते हुए नारे लगाए। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
यह कार्रवाई उस समय हुई, जब सीजेपी और विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
अभिजीत दिपके ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने पार्टी नेताओं के खिलाफ हुई कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या अब राष्ट्रीय ध्वज फहराना भी गैरकानूनी हो गया है। दिपके ने कहा कि आशुतोष और सौरव को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और उनकी गलती जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना थी।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि विरोध की आवाज दबाने का इतना ही दृढ़ इरादा है, तो ऐसे तरीकों का सहारा लेने के बजाय आधिकारिक रूप से आपातकाल घोषित करने की हिम्मत दिखाई जानी चाहिए।
तिरंगा फहराने के कारण जेल भेजने का आरोप
सीजेपी नेता अजिंक्य शिंदे ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने और 'भारत माता की जय' के नारे लगाने के चलते आशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। उन्होंने बताया कि आशुतोष का जन्मदिन भी उसी दिन था, जब उन्हें जेल भेजा गया।
शिंदे ने मोदी-शाह सरकार पर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने और लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जेल भेजकर नेताओं को डराने की कोशिश सफल नहीं होगी और वे सिर ऊंचा करके जेल जा रहे हैं।
एसआईआर को लेकर क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन?
सीजेपी और विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। इसी मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
चुनाव आयोग ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, वे उन्हें दोबारा जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। सीजेपी की मांग है कि एसआईआर से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय की जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा दें।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने पर विवाद
विवाद तब बढ़ा, जब दिल्ली पुलिस ने 12 अक्तूबर को जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटा दिया। अधिकारियों ने प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान सहित वैकल्पिक स्थान तय किए।
सीजेपी ने इस निर्णय पर आपत्ति जताई और जंतर-मंतर पर ही प्रदर्शन करने की मांग की। पार्टी ने पुलिस को प्रदर्शन की तारीख तय करने के लिए समय भी दिया था।
इससे पहले भी हिरासत में लिए गए थे सीजेपी नेता
इससे पहले 10 अक्तूबर को सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को पुलिस ने हिरासत में लिया था। बाद में 11 अक्तूबर को एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर उन्हें रिहा कर दिया गया।
हालांकि, अभिजीत दिपके ने दावा किया था कि उन्होंने ऐसा कोई बॉन्ड नहीं भरा था, जो उन्हें आगे प्रदर्शन करने से रोकता हो। इसके बाद पार्टी ने अपना विरोध जारी रखने का फैसला किया।
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