कोलाथुर चुनाव मामले में स्टालिन को मद्रास हाईकोर्ट से झटका, 100% VVPAT गिनती की मांग वाली याचिका खारिज

HIGHLIGHTS
- स्टालिन ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का दावा किया था।
- उनकी याचिका में 14 EVM और VVPAT मशीनों के सत्यापन में विसंगतियों का जिक्र था।
- उन्होंने सभी EVM और VVPAT मशीनों के दोबारा सत्यापन की मांग की थी।
चेन्नई। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन को कोलाथुर विधानसभा सीट से जुड़े चुनावी मामले में मद्रास हाईकोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने गुरुवार को उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें निर्वाचन क्षेत्र में 100 फीसदी VVPAT पर्चियों की गिनती कराने की मांग की गई थी। स्टालिन ने अपनी याचिका में चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए 14 EVM और VVPAT मशीनों के सत्यापन में विसंगतियां मिलने का दावा किया था। उन्होंने निर्वाचन क्षेत्र में इस्तेमाल की गई सभी EVM और VVPAT मशीनों का दोबारा सत्यापन कराने की मांग भी की थी।
हाईकोर्ट के फैसले से क्या बदला?
मद्रास हाईकोर्ट के याचिका खारिज करने के बाद स्टालिन की ओर से कोलाथुर चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली मौजूदा कानूनी मांग को राहत नहीं मिली। उनकी याचिका में 100 फीसदी VVPAT गिनती, सभी मशीनों के दोबारा सत्यापन, पुनर्गणना और खुद को विजेता घोषित करने जैसी मांगें की गई थीं, जिन्हें अदालत ने स्वीकार नहीं किया।
स्टालिन ने क्या मांग की थी?
याचिका में स्टालिन ने वोटों की दोबारा गिनती कराने और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के विधायक वीएस बाबू की जीत को रद्द करने की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने खुद को कोलाथुर सीट से विजेता घोषित करने की अपील भी अदालत से की थी। स्टालिन का दावा था कि मतदान प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के कारण चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ। इसी आधार पर उन्होंने सभी मतदान मशीनों की दोबारा जांच और VVPAT पर्चियों की शत-प्रतिशत गिनती की मांग की थी।
2026 में स्टालिन के गढ़ में पलट गया चुनावी परिणाम
2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कोलाथुर सीट पर बड़ा उलटफेर देखने को मिला। स्टालिन को नवगठित TVK के उम्मीदवार वीएस बाबू ने 8,795 वोटों के अंतर से हराया। कोलाथुर को स्टालिन का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। वह इस सीट से लगातार तीन बार विधायक रह चुके थे और चौथी बार भी जीत की कोशिश में थे, लेकिन इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
चुनावी हार के बावजूद स्टालिन ने मतदाताओं का आभार जताया था। उन्होंने कहा था कि डीएमके गठबंधन को 1.54 करोड़ से अधिक वोट मिले और विजेता दल के मुकाबले वोटों का अंतर महज 3.52 प्रतिशत रहा।
कोलाथुर में जीत के बाद वीएस बाबू ने अपनी सफलता का श्रेय पार्टी प्रमुख विजय और स्थानीय स्तर पर लोगों से अपने जुड़ाव को दिया था। उन्होंने कहा था कि तमिलनाडु की जनता बदलाव चाहती थी और इसी वजह से उन्हें जीत मिली। बाबू ने यह भी कहा था कि वह इसी क्षेत्र में पले-बढ़े हैं और स्थानीय लोगों की नब्ज को समझते हैं। उनके मुताबिक, स्टालिन को कोलाथुर के स्थानीय लोगों के साथ ज्यादा जुड़ना चाहिए था।
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