कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री अब भी लापता, परिजनों ने सरकार से सर्च ऑपरेशन तेज करने की मांग की

HIGHLIGHTS
- 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई बाढ़ के बाद तीर्थयात्री लापता हैं।
- याचिका में नेपाल और चीन के अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने की मांग की गई।
- भारत से खोज, रिकवरी और फोरेंसिक विशेषज्ञता भेजने की अपील की गई।
रिचा टूर्स के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। लापता तीर्थयात्रियों के परिजन इससे बेहद दुखी और निराश हैं। अब परिजनों ने सरकार से भावुक अपील करते हुए एक याचिका जारी की है। इसमें नेपाल में भारत के राजदूत और भारतीय विदेश सचिव से लापता लोगों की तलाश के लिए तत्काल तलाशी अभियान शुरू करने, फोरेंसिक पहचान के लिए भारत से टीम भेजने, परिवारों के साथ स्पष्ट संवाद करने और सम्मानजनक दस्तावेजी प्रक्रिया अपनाने की अपील की गई है।
लापता तीर्थयात्रियों ने सरकार से क्या अपील की?
लापता तीर्थयात्रियों के परिजनों ने याचिका में कहा है, 'हम उन भारतीय तीर्थयात्रियों के रिश्तेदार और परिवार के सदस्य हैं, जो 'रिचा टूर्स' के साथ यात्रा कर रहे थे और 26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई भयानक बाढ़ के बाद से लापता हैं। हम भारत सरकार और काठमांडू में भारतीय दूतावास से सम्मानपूर्वक अपील करते हैं कि वे नेपाल सरकार और चीनी अधिकारियों के साथ मिलकर काम करें, ताकि लापता भारतीय नागरिकों का पता लगाने, उन्हें वापस लाने और उनकी पहचान करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा सके।'
इस याचिका को देशभर से लोगों का समर्थन मिल रहा है। अब तक 23 हजार से अधिक लोग इस पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। वहीं, इसे सोशल मीडिया पर 25,577 बार साझा किया जा चुका है।
विशेषज्ञ खोज और बचाव सहायता तेज करने की मांग
याचिका में कहा गया है कि भारत सरकार को नेपाल के लिए विशेष खोज, रिकवरी, मलबा हटाने, तकनीकी खोज और फोरेंसिक क्षमताओं की तत्काल पेशकश करनी चाहिए। सीमावर्ती क्षेत्रों में जरूरत पड़ने पर भारत को चीनी अधिकारियों से भी सहायता लेनी चाहिए। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों का लगातार आकलन किया जाना चाहिए और इसके लिए बेहतर विशेषज्ञता व उपकरणों का इस्तेमाल होना चाहिए।
डीएनए और फोरेंसिक पहचान की प्रक्रिया
याचिका में मांग की गई है कि नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) या किसी अन्य सक्षम भारतीय फोरेंसिक संस्था को नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर डीएनए आधारित पहचान में सहायता और समन्वय करना चाहिए। काठमांडू में परिवारों के लिए डीएनए सैंपल देने की सुविधा शुरू हो चुकी है। भारत में भी परिवारों को निर्धारित सरकारी प्रयोगशालाओं तक तत्काल पहुंच, कस्टडी की स्पष्ट प्रक्रिया, सैंपल के सुरक्षित ट्रांसफर और पहचान प्रक्रिया से जुड़े नियमित अपडेट दिए जाने की जरूरत है।
पीड़ित परिवारों से स्पष्ट संवाद की मांग
याचिका में कहा गया है कि दूतावास और भारत सरकार प्रभावित परिवारों के लिए एक वरिष्ठ नोडल अधिकारी नियुक्त करें। परिवारों को खोज, रिकवरी, पहचान और स्वदेश वापसी की प्रक्रिया से जुड़े स्पष्ट, भरोसेमंद और नियमित अपडेट दिए जाएं।
मदद के लिए समय-सीमा वाला ढांचा
परिजनों ने मांग की है कि लापता व्यक्ति और मृतकों से जुड़े दस्तावेजीकरण की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के बारे में परिवारों को स्पष्ट जानकारी दी जाए। इसके साथ ही अनुमानित समय-सीमा, अंतिम संस्कार, स्वदेश वापसी और अन्य संबंधित मामलों की जानकारी भी दी जानी चाहिए। याचिका में यह भी कहा गया है कि अगर तमाम प्रयासों के बावजूद पहचान या शव बरामद नहीं हो पाता है, तो ऐसी कानूनी और संवेदनशील प्रक्रिया होनी चाहिए, जिससे परिवारों को अनिश्चितता की स्थिति में न रहना पड़े।
पहचान के लिए साफ तस्वीरें उपलब्ध कराने की मांग
परिजनों ने याचिका के जरिए विदेश मंत्रालय से अपील की है कि वह नेपाल पुलिस से पहचान न हो पाने वाले मृतकों की बेहतर रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरें उपलब्ध कराने को कहे और इस दौरान प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाए। बेहतर गुणवत्ता वाली तस्वीरों से परिवारों को पहचान करने और अधिकारियों को जरूरी जानकारी देने में मदद मिल सकती है।
मृतकों की संख्या 1,252 पहुंची, 4,875 लोग अब भी लापता
नेपाल के प्रभावित इलाकों से लगातार शव मिलने के साथ ही बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,252 हो गई है। वहीं, हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल पुलिस की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा 355 शव चितवन जिले से बरामद किए गए हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट से 218 और नवलपरासी वेस्ट से 208 शव मिले हैं। नवलपरासी वेस्ट के आंकड़े में भारत से बरामद कर सौंपे गए 18 शव भी शामिल हैं।
इसके अलावा नुवाकोट से 177, रासुवा से 127, गोरखा से 69, धादिंग से 60 और तनाहुन से 38 शव बरामद किए गए हैं। नेपाल सेना के नेतृत्व में संयुक्त बचाव दल हादसे के नौवें दिन गुरुवार को भी प्रभावित इलाकों में तलाशी और राहत अभियान चला रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, अभी 4,875 लोगों के लापता होने का अनुमान है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.



















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.