दिल्ली जिमखाना क्लब पर 16 सितंबर तक कार्रवाई नहीं करेगा केंद्र, हाईकोर्ट में दिया आश्वासन

HIGHLIGHTS
- क्लब की स्थायी लीज डीड 22 मई के आदेश के तहत समाप्त की गई थी।
- क्लब को 5 जून तक जमीन वापस करने के लिए कहा गया था।
- अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत में आश्वासन दिया।
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि दिल्ली जिमखाना क्लब के खिलाफ 16 सितंबर तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह बयान सफदरजंग रोड स्थित 27.3 एकड़ परिसर से बेदखली के मामले में दिया गया। न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्य विजय खुराना और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे। इन याचिकाओं में 29 जून को जारी बेदखली के कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने की मांग की गई है।
विजय खुराना और दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन की याचिकाएं एक लंबित मुकदमे से जुड़ी हैं। इस मुकदमे में भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) के 22 मई के आदेश को चुनौती दी गई है। इस आदेश के तहत क्लब की स्थायी लीज डीड समाप्त कर दी गई थी। क्लब को 5 जून तक जमीन वापस करने के लिए कहा गया था। केंद्र ने इसके पीछे "रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने" का आधार बताया था। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया।
उन्होंने कहा कि पहले दिया गया बयान आगे भी जारी रहेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि याचिकाओं पर जवाब और दलीलें पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने बेदखली नोटिस पर अंतरिम रोक के मुद्दे को सुनवाई के लिए तैयार बताया। न्यायमूर्ति झिंगन ने कहा कि दलीलों के लिए किसी अन्य तारीख पर सुनवाई की जाएगी। उन्होंने क्लब के सदस्यों को संपदा अधिकारी के सामने जवाब दाखिल करने का सुझाव दिया। अदालत ने मामले को 16 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
लीज समाप्ति और केंद्र का रुख
केंद्र ने हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया था। इसमें कहा गया था कि स्थायी लीज समाप्त होने के बाद सरकार को जमीन अपने कब्जे में लेने से रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। केंद्र ने बताया कि सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम के तहत बेदखली से जुड़े मुकदमे पर दीवानी अदालत का अधिकार क्षेत्र सीमित है। संपदा अधिकारी की कार्रवाई के संबंध में निषेधाज्ञा जारी करना भी प्रतिबंधित है।
केंद्र ने तर्क दिया कि स्थायी लीज डीड दो पक्षों के बीच हुआ समझौता था। क्लब का कोई सदस्य इस समझौते का पक्षकार नहीं था। इसलिए वे अधिकारियों को अपने संविदात्मक अधिकारों का इस्तेमाल करने से नहीं रोक सकते।
बेदखली नोटिस और खुराना की चुनौती
आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन एलएंडओ ने 29 जून को क्लब को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसमें पूछा गया था कि सार्वजनिक परिसर अधिनियम के तहत बेदखली का आदेश क्यों न पारित किया जाए। संपदा अधिकारी बिपिन कुमार सिंह ने क्लब और परिसर पर कब्जा रखने वाले सभी लोगों को 7 जुलाई तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा था। उन्हें उसी दिन दोपहर 2:30 बजे व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था।
यह कार्रवाई केंद्र के 26 मई के बयान के एक महीने से अधिक समय बाद की गई थी। केंद्र ने उस समय कहा था कि वह 5 जून तक क्लब के 27.3 एकड़ परिसर पर जबरन कब्जा नहीं लेगा। खुराना ने अपने मुकदमे में केंद्र द्वारा बताए गए "रक्षा बुनियादी ढांचे" के कारण को "दिखावा" बताया है।
अंतरिम राहत की मांग
खुराना ने दावा किया कि यह कदम कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करने के बजाय जबरन बेदखली की कोशिश है। उनकी याचिका को क्लब के 500 से अधिक सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। 26 मई को अदालत ने कहा था कि बेदखली के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू किए जाने का कोई संकेत नहीं था। इसलिए उस समय अंतरिम आदेश की आवश्यकता नहीं थी।
खुराना ने अपनी अंतरिम अर्जी में 29 जून के नोटिस को "पूरी तरह गलत" बताया। उन्होंने कहा कि यह समय से पहले लगाए गए अनुमानों पर आधारित है। अर्जी में बेदखली आदेश पर रोक लगाने के साथ क्लब के कब्जे, संचालन और कामकाज की मौजूदा स्थिति बनाए रखने की मांग की गई है।
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