लखनऊ हत्याकांड: मृतक की बेटी ने मांगा एक करोड़ रुपये मुआवजा, मां के लिए सरकारी नौकरी की मांग

HIGHLIGHTS
- मृतक की बेटी ने परिवार के लिए एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की।
- मां के लिए सरकारी नौकरी और परिवार की महिलाओं के लिए आजीवन सुरक्षा की मांग उठी।
- परिजनों ने आरोपियों के घर पर बुलडोजर कार्रवाई की मांग की।
लखनऊ: सोमवार को हुई घटना के बाद मृतक की बेटी ने सामने आकर अपनी मांगें रखीं। कैमरे पर उसने कहा, “आज योगी जी की बेटी अनाथ हुई।” उसने आरोप लगाया कि जिस घर में आरोपी रह रहे हैं, वह अवैध है और उस पर बुलडोजर चलना चाहिए।
मृतक की बेटी ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं। उसने कहा कि उसके परिवार को एक करोड़ रुपये दिए जाएं और उसकी मां, जो मृतक श्रीकांत तिवारी की पत्नी हैं, को सरकारी नौकरी दी जाए। उसने अपनी शिक्षा से जुड़ी सभी जिम्मेदारियां सरकार द्वारा उठाए जाने की भी मांग की।
उसने कहा कि उनके घर पर आजीवन सुरक्षा होनी चाहिए, क्योंकि अब उसे, उसकी मां और बड़ी मां को जान का खतरा है। उसके मुताबिक, अभी भी लोग उनसे कह रहे हैं कि घर में तीन महिलाएं हैं और उन्हें दबा लिया जाएगा। उसने सआदतगंज और थाना कश्मीरी मोहल्ला में सभी के निलंबन की मांग भी की।
छह घंटे तक शव रखकर प्रदर्शन, आरोपी के घर में घुसने की कोशिश
सआदतगंज के नौबस्ता स्थित ब्राह्मणी टोला में सोमवार को पार्किंग विवाद में एक ही परिवार के तीन लोगों की गोली मारकर हत्या के मामले ने मंगलवार को तूल पकड़ लिया। पोस्टमार्टम के बाद शिवाजी तिवारी, उनके भाई शंभू तिवारी और बेटे सुयश तिवारी के शव घर पहुंचे तो परिवार में कोहराम मच गया।
कुछ देर तक अंतिम दर्शन कराने के बाद नाराज परिजन शवों को उसी चबूतरे के पास ले गए, जिसे लेकर विवाद हुआ था। उन्होंने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद नारेबाजी शुरू हो गई। हंगामा बढ़ने पर 10 थानों की पुलिस फोर्स को बुलाया गया।
दूसरी ओर, शिवाजी के रिश्तेदारों और करीबियों की भीड़ जुटने लगी। आक्रोशित लोगों ने हत्यारोपी ऋषभ शुक्ला के मकान पर बुलडोजर चलाने की मांग की। काफी देर तक कार्रवाई न होने पर भीड़ ने ऋषभ के घर में घुसने की कोशिश की। घर के बाहर खड़े दोपहिया वाहन में तोड़फोड़ की गई और मकान में भी तोड़फोड़ करने का प्रयास हुआ।
पुलिस फोर्स ने कड़ी मशक्कत के बाद लोगों को मकान में घुसने से रोका। आरोपी के घर के बाहर सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाने से लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस आरोपी का पक्ष ले रही है। इसके बाद ऋषभ के एनकाउंटर की मांग भी उठने लगी।
डीएम और पुलिस कमिश्नर को बुलाने की मांग
आक्रोशित लोगों ने कहा कि डीएम और पुलिस कमिश्नर को बुलाया जाए, तभी बातचीत होगी। उनका कहना था कि शहर में दिनदहाड़े तीन लोगों की हत्या हो गई, लेकिन अधिकारी पीड़ित परिवार से मिलने तक नहीं आए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए दोपहर करीब एक बजे डीएम विशाख जी. और पुलिस आयुक्त तरुन गाबा मौके पर पहुंचे। दोनों सीधे शिवाजी के घर गए। अधिकारियों और पीड़ित परिवार के बीच काफी देर तक बातचीत हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
आरएसएस पदाधिकारियों ने भी जताई नाराजगी
शिवाजी तिवारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे। उनकी अंतिम यात्रा में आरएसएस के कई पदाधिकारी भी पहुंचे। पीड़ित परिवार की स्थिति देखकर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने नाराजगी जताई और डीजीपी तथा प्रमुख सचिव गृह को बुलाने की बात कही। इस दौरान फोन पर उच्चाधिकारियों से उनकी बहस भी हुई।
संघ ने पीड़ित परिवार की मांगें मानने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। इस दौरान पुलिस अधिकारियों को भी लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा।
ब्रजेश पाठक और नीरज सिंह ने शवों को दिया कंधा
हंगामे के बीच दोपहर 2:45 बजे महापौर सुषमा खर्कवाल मौके पर पहुंचीं। उनके पहुंचते ही लोगों ने फिर नारेबाजी शुरू कर दी। करीब 3:15 बजे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और भाजपा नेता नीरज सिंह परिवार से मिलने पहुंचे। इस दौरान भी सरकार विरोधी नारे लगाए गए।
डिप्टी सीएम ने आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। उनके आश्वासन के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए। ब्रजेश पाठक और नीरज सिंह ने शवों को कंधा दिया और गुलाला घाट पर अंतिम संस्कार में भी शामिल हुए।
छपने गए थे शादी के कार्ड, अब तेरहवीं की तैयारी
जिस परिवार में वर्षों बाद मांगलिक कार्यक्रम होने वाला था, वहां अब मातम पसरा है। सुयश की शादी के कार्ड छपने के लिए दिए गए थे और मेहमानों की सूची तैयार की जा रही थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि शादी से पहले परिवार को तीन लोगों की तेरहवीं की तैयारी करनी पड़ेगी। ब्राह्मणी टोला में हर तरफ इसी घटना की चर्चा थी।
एक साथ तीन अर्थियां उठीं तो शिवाजी तिवारी की पत्नी ऊषा की चीख निकल पड़ी। कभी वह बेटे के शव से लिपटकर उसे निहारतीं, तो कभी अपने पति को अंतिम विदाई देतीं। ऊषा की हालत देखकर वहां मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखें नम हो गईं।
सुयश रविवार को परिवार के साथ ननिहाल में दिवाई की रस्म कराने गए थे। शादी का ज्यादातर सामान खरीदा जा चुका था। माता-पिता अपने इकलौते बेटे की शादी धूमधाम से करने की तैयारी में थे। बेटे के कमरे का नवीनीकरण कराया जा रहा था और घर की मरम्मत के साथ पुताई का काम भी चल रहा था।
सुयश कुछ दिन बाद शादी के लिए अपने कपड़े खरीदने वाले थे। इसके लिए उन्होंने दोस्तों से भी बात की थी। मंगलवार को उनके दोस्त भी वहां मौजूद थे, लेकिन सभी की आंखों में आंसू थे। कॉलोनी की महिलाएं ऊषा, रुचि और सुमेधा को सांत्वना दे रही थीं।
नौबस्ता स्थित ब्राह्मणी टोला में सोमवार रातभर मोहल्ले के लोग जागते रहे। हर घर में इसी घटना को लेकर चर्चा होती रही।
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