कूनो से बाहर निकले चीता शावक की गोली लगने से मौत, शरीर से मिले पांच छर्रे

HIGHLIGHTS
- मुरैना में निर्वा के शावक ने एक घर के बाड़े में बंधे बछड़ों का शिकार किया था।
- शुरुआती जानकारी में ग्रामीणों द्वारा लाठी-डंडों से हमला किए जाने की बात सामने आई थी।
- 25 अक्टूबर की रात मुरैना और श्योपुर जिले की सीमा से शावक को रेस्क्यू किया गया।
एमपी: कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकलकर मुरैना पहुंचे मादा चीता निर्वा के करीब 19 महीने के शावक की गोली लगने से मौत हो गई। शावक की मौत के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। देश में पहली बार चीते को गोली मारकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना ने कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकलने वाले चीतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शुरुआती जानकारी में चीते के घायल होने की वजह ग्रामीणों का हमला बताया गया था। हालांकि, उपचार के दौरान उसके शरीर से छर्रे मिलने के बाद गोली लगने की पुष्टि हुई।
जानकारी के मुताबिक, रविवार को मुरैना इलाके में निर्वा के मादा चीता शावक ने एक घर के बाड़े में बंधे बछड़ों का शिकार किया था। इसके बाद ग्रामीणों के साथ संघर्ष की बात सामने आई। शुरुआती रिपोर्ट में बताया गया कि ग्रामीणों ने चीता शावक को लाठी-डंडों से पीटकर घायल कर दिया था। इसके बाद वन विभाग की टीम ने उसे रेस्क्यू कर उपचार के लिए भेजा।
डॉक्टर ने की शरीर से छर्रे मिलने की पुष्टि
चीता शावक को करीब से गोली मारे जाने की बात सामने आई है। उसके पेट में कई छर्रे मिले। 25 अक्टूबर की रात मुरैना और श्योपुर जिलों की सीमा से उसे रेस्क्यू किया गया था। इसके बाद उपचार के लिए जबलपुर स्थित पशु चिकित्सा केंद्र भेजा गया।
वहां ऑपरेशन के दौरान जबलपुर वेटरनरी कॉलेज की डॉक्टर डॉ. शोभा जावरे ने चीते के शरीर से छर्रे निकलने की पुष्टि की। उपचार के दौरान उसकी हालत गंभीर बनी रही और आखिरकार उसकी मौत हो गई।
वहीं, इस मामले में डायरेक्टर वाइल्ड लाइफ आरके शर्मा ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने जबलपुर में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए यह बात कही।
ऑपरेशन के दौरान निकाले गए पांच छर्रे
जबलपुर के पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, कूनो राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए एक चीते को 26 अक्टूबर 2026 की रात करीब 11:50 बजे गंभीर रूप से घायल अवस्था में महाविद्यालय लाया गया था। उसके शरीर पर कई घाव थे। पिछले दोनों पैरों में लकवे जैसी स्थिति थी और पेशाब रुकने की समस्या भी थी।
इन लक्षणों के आधार पर रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण तंत्रिका तंत्र प्रभावित होने की आशंका जताई गई। चीते के सीटी स्कैन में रीढ़ की हड्डी के पास धातु के कई कण मिले।
विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. शोभा जवरे और प्रोफेसर डॉ. रणधीर सिंह की निगरानी में किए गए ऑपरेशन के दौरान उसके शरीर से बंदूक से चलाए गए पांच छर्रे निकाले गए। सर्जरी के बाद चीते को गहन चिकित्सा और निगरानी में रखा गया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण 27 अक्टूबर की सुबह करीब 5:10 बजे उसकी मौत हो गई।
महाविद्यालय के अनुसार, मामले की रिपोर्ट प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), भोपाल को भेज दी गई है।
कूनो से बाहर निकलने वाले चीतों की सुरक्षा पर सवाल
कूनो नेशनल पार्क में भारत के महत्वाकांक्षी चीता प्रोजेक्ट के तहत सितंबर 2022 में चीतों को देश में फिर से बसाया गया था। उनकी निगरानी के लिए रेडियो कॉलर लगाए गए हैं। वन विभाग की टीमें भी उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखती हैं।
इसके बावजूद निर्वा के शावक का पार्क से बाहर निकलना और फिर गोली लगने से उसकी मौत होना निगरानी व्यवस्था के सामने चुनौती बनकर सामने आया है। वन्यजीव विशेषज्ञों के सामने सवाल है कि रेडियो कॉलर के जरिए चीतों की लोकेशन पर नजर रखे जाने के बावजूद पार्क से बाहर निकलने के बाद उन्हें ग्रामीण इलाकों में समय रहते सुरक्षित क्यों नहीं किया जा सका।
चीतों की सुरक्षा वन विभाग के लिए चुनौती
कूनो के आसपास के इलाकों में चीतों का विचरण वन विभाग के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है। पार्क की सीमा से बाहर पहुंचने पर उनका सामना ग्रामीण आबादी और पालतू पशुओं से होता है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ जाती है।
चीता शावक की गोली लगने से मौत ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि कूनो से बाहर निकलने वाले चीतों की सुरक्षा के लिए निगरानी और रेस्क्यू व्यवस्था को और कितना मजबूत करने की जरूरत है।
मई से अब तक छह चीतों की मौत
मई 2026 में मादा चीता KGP-12 के चार शावक मृत मिले थे। उस समय शुरुआती तौर पर किसी दूसरे जंगली जानवर के हमले की आशंका जताई गई थी। वहीं, अक्टूबर 2026 में मादा चीता आशा के चार शावकों में से करीब आठ महीने के एक शावक की मौत हुई थी। अब निर्वा के शावक की भी मौत हो गई है।
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