महाराष्ट्र: चुनाव आयोग के खिलाफ ठाकरे बंधुओं का मार्च, SIR के विरोध में सड़क पर उतरे

HIGHLIGHTS
- प्रदर्शन में कांग्रेस और एनसीपी शरद पवार के नेता भी शामिल होंगे।
- मनसे और शिवसेना (यूबीटी) ने रैली की संगठनात्मक तैयारियां की हैं।
- आयोजकों ने सभी राजनीतिक दलों से एकजुट विपक्षी मोर्चे में शामिल होने की अपील की है।
मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को लेकर विरोध दर्ज कराने के लिए रविवार को मुंबई में बड़ी जन-विरोध रैली का आह्वान किया है। ठाकरे बंधुओं की अपील के बाद रैली के लिए लोगों का जुटना शुरू हो गया है। प्रदर्शन में कांग्रेस और एनसीपी शरद पवार के नेता भी शामिल होंगे।
इस प्रदर्शन का उद्देश्य वोटर लिस्ट में कथित हेरफेर और चुनावी रोल की 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) प्रक्रिया से जुड़ी संरचनात्मक गड़बड़ियों के खिलाफ विरोध दर्ज कराना है। शनिवार को शिवसेना (यूबीटी) और मनसे ने चुनाव आयोग पर तीखे आरोप लगाए। दोनों दलों ने आयोग पर वोटरों को धोखा देने और केंद्र में सत्ताधारी पार्टी की एक शाखा की तरह काम करने का आरोप लगाया। हालांकि, दोनों पार्टियां प्रदर्शन की संगठनात्मक तैयारियों में जुटी हैं, लेकिन नेताओं ने इसे पार्टी की राजनीति से ऊपर बताया है।
क्या है रैली की योजना?
आयोजकों ने इस रैली को बड़े जन-आंदोलन के रूप में पेश किया है। इसके लिए सभी राजनीतिक दलों से बातचीत कर एकजुट विपक्षी मोर्चा बनाने की योजना की बात कही गई है। बयान में कहा गया कि यह जनता की रैली है और इसे किसी एक पार्टी तक सीमित रखने के बजाय पूरे राजनीतिक सिस्टम और नागरिकों की सामूहिक आवाज बनाया जाएगा। इसके लिए सभी राजनीतिक दलों से मोर्चे में शामिल होने को लेकर संपर्क किया जाएगा।
आंदोलन को देश के लोकतांत्रिक ढांचे और संस्थागत अखंडता की रक्षा से जुड़ी निर्णायक लड़ाई बताया गया है।
मुंबई की जनता से क्या अपील की गई?
नागरिकों से मुंबई की सड़कों पर बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की गई है। आयोजकों के मुताबिक, आंदोलन का उद्देश्य एसआईआर प्रक्रिया में कथित संस्थागत पक्षपात और वोटर लिस्ट में कथित हेरफेर के खिलाफ विरोध दर्ज कराना है। मार्च मेट्रो सिनेमा से शुरू होगा।
जनता से रैली में बड़ी संख्या में शामिल होने और देश के लोकतंत्र तथा संविधान की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की गई है।
इससे पहले राज ठाकरे ने भाजपा और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाते हुए चल रही 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर सत्ता में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए अहम संस्थागत लोगों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। साथ ही उन्होंने देशभर के सभी विपक्षी दलों से पेपर बैलेट की वापसी की मांग को लेकर बड़े आंदोलन के लिए एकजुट होने की अपील की थी।
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