फिरोजाबाद में मासूम आरव हत्याकांड: दोषी विराज को फांसी की सजा, 41 दिन में फैसला

HIGHLIGHTS
- फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में डेढ़ साल के मासूम आरव की हत्या के दोषी विराज को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई।
- 30 मई की घटना में पुलिस ने छह दिन में जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल किया था।
- 41 दिनों में आए फैसले को त्वरित न्याय के महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में डेढ़ साल के मासूम आरव की बेरहमी से हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जनपद न्यायाधीश की अदालत ने शुक्रवार को दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई। इस मामले में महज 41 दिनों के भीतर फैसला आने को त्वरित न्याय के तौर पर देखा जा रहा है।
मामला शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी का है, जहां 30 मई को सिरसागंज तहसील क्षेत्र के बामई गांव निवासी रति के डेढ़ वर्षीय बेटे आरव की जमीन पर पटक-पटककर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद सामने आए वीडियो ने लोगों को झकझोर दिया था।
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी विराज पीड़िता से शादी करना चाहता था, लेकिन रति अपने बच्चे के कारण इसके लिए तैयार नहीं थी। इसी बात से नाराज होकर उसने मासूम आरव की हत्या कर दी। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी को कुछ घंटों के भीतर मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के दौरान उसके पैरों में गोली लगी थी।
छह दिन में दाखिल हुआ आरोप पत्र
शिकोहाबाद पुलिस ने मामले में तेजी दिखाते हुए छह दिनों के भीतर जांच पूरी कर 13 गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया था।
मामले की सुनवाई जनपद न्यायाधीश डॉ. बब्बू सारंग की अदालत में हुई। अदालत ने गुरुवार को आरोपी को दोषी ठहराया था, जिसके बाद शुक्रवार को सजा पर फैसला सुनाया गया।
अभियोजन ने पेश किए 13 गवाह
जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से 13 गवाह पेश किए गए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से एक गवाह आया। उन्होंने कहा कि यह बेहद जघन्य अपराध था और मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस व प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की।
अदालत के फैसले के बाद पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों के निर्देश पर मामले की प्रभावी पैरवी की गई, जिसके चलते कम समय में फैसला संभव हो सका।
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