मुजफ्फरनगर पुलिस का बड़ा खुलासा, फर्जी बैंक खातों से साइबर ठगी की रकम खपाने वाला आरोपी गिरफ्तार

HIGHLIGHTS
- मुजफ्फरनगर साइबर पुलिस ने फर्जी पैन और जीएसटी दस्तावेजों के जरिए बैंक खाता खोलकर साइबर ठगी की रकम खपाने वाले आरोपी अदनान चौहान को गिरफ्तार किया।
- जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने दूसरे व्यक्ति के नाम से फर्जी पहचान बनाकर एचडीएफसी बैंक में खाता संचालित किया था।
- पुलिस के अनुसार खाते का इस्तेमाल शेयर मार्केट, क्रिप्टो और ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी गई रकम को ट्रांसफर और छिपाने के लिए किया जाता था।
मुजफ्फरनगर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े धन के लेनदेन में इस्तेमाल किए जा रहे एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराध से अर्जित रकम को इधर-उधर करने का काम करता था।
एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान मेरठ जिले के रोहटा थाना क्षेत्र स्थित सलाहपुर गांव निवासी अदनान चौहान के रूप में हुई है। जांच के दौरान पुलिस को एचडीएफसी बैंक के एक संदिग्ध खाते की जानकारी मिली, जो "एम/एस क्रिएटिव हैंडीक्राफ्ट" नामक फर्म के नाम से संचालित हो रहा था।
जांच में सामने आया फर्जी पहचान का खेल
पुलिस की जांच में पाया गया कि खाते में प्रोपराइटर के रूप में मोहित कुमार का नाम दर्ज था, लेकिन उससे जुड़े मोबाइल नंबर, केवाईसी दस्तावेज, पैन कार्ड, जीएसटी पंजीकरण और फोटो की पड़ताल करने पर वास्तविक संचालक अदनान चौहान निकला।
आरोप है कि अदनान ने मोहित कुमार के नाम से फर्जी पैन कार्ड और जीएसटी दस्तावेज तैयार कराए और उन्हीं के आधार पर बैंक खाता खुलवाया। इसके बाद वह अपनी असली पहचान छिपाकर खाते का संचालन कर रहा था।
साइबर ठगी की रकम को खपाने में होता था इस्तेमाल
प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस खाते का उपयोग शेयर मार्केट, क्रिप्टो निवेश और अन्य ऑनलाइन निवेश योजनाओं के नाम पर लोगों से ठगी गई रकम को प्राप्त करने, ट्रांसफर करने और उसके स्रोत को छिपाने के लिए किया जा रहा था।
पुलिस को आशंका है कि आरोपी किसी बड़े साइबर नेटवर्क का हिस्सा है, जो देशभर में साइबर अपराध से जुड़े धन की लेयरिंग और वितरण का काम करता है।
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी
साइबर थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। अब जांच एजेंसियां बैंक खातों के लेनदेन, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस आरोपी के आगे और पीछे के संपर्कों (फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक) को भी खंगाल रही है।
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