मुजफ्फरनगर: दादी को कांवड़ में बैठाकर निकला पोता, हापुड़ के शिवभक्त की भक्ति बनी मिसाल

HIGHLIGHTS
- प्रशांत राणा ने श्रद्धा के साथ दादी को कांवड़ में बैठाकर पूरी की धार्मिक यात्रा।
- संतुलन बनाए रखने के लिए कांवड़ के दोनों पलड़ों में रखा गया बराबर वजन।
- दादी ने युवाओं से बुजुर्गों के सम्मान और सेवा की अपील की।
मुजफ्फरनगर: कांवड़ यात्रा के दौरान हापुड़ के शिवभक्त प्रशांत राणा अपनी दादी शारदा देवी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर वापस लौट रहे हैं। शुक्रवार को उनकी श्रवण कांवड़ जब मुजफ्फरनगर के शिव चौक पहुंची तो वह श्रद्धालुओं और राहगीरों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गई।
दादी को गंगा स्नान कराने का था संकल्प
प्रशांत राणा ने बताया कि उनका उद्देश्य अपनी दादी को हरिद्वार में गंगा स्नान कराना और उन्हें कांवड़ यात्रा का अनुभव कराना था। उन्होंने भगवान शिव से परिवार की सुख-शांति और दादी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना भी की।
इस यात्रा में प्रशांत के साथ उनके भाई समेत कुल 22 शिवभक्त शामिल हैं।
कांवड़ में संतुलन के लिए रखा गया बराबर वजन
प्रशांत ने बताया कि उनकी दादी शारदा देवी का वजन करीब 45 किलोग्राम है। इसी को ध्यान में रखते हुए कांवड़ के दूसरे पलड़े में भी लगभग 45 किलोग्राम वजन रखा गया है, जिससे यात्रा के दौरान संतुलन बना रहे।
पूरी टोली श्रद्धा और सेवा भाव के साथ इस धार्मिक यात्रा को पूरा कर रही है।
दादी ने युवाओं को दिया बुजुर्गों की सेवा का संदेश
शारदा देवी ने अपने पोतों की सेवा भावना पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि हर युवा को अपने बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए और उनकी सेवा करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि परिवार के संस्कार, सम्मान और सेवा भावना का संदेश भी देती है।
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