मुजफ्फरनगर के टैलेंट ऋतु इंसा इंस्टीट्यूट विवाद में नया मोड़, छात्राएं आईं समर्थन में

HIGHLIGHTS
- विवाद के बाद संस्थान में प्रशिक्षण ले रही छात्राओं ने प्रबंधन के समर्थन में बयान दिया।
- छात्राओं ने कहा कि यहां कम शुल्क में नियमित और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाता है।
- संचालक सुखराज धनकर ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए प्रमाण-पत्र वितरण प्रक्रिया को स्पष्ट किया।
मुजफ्फरनगर। शहर के सर्कुलर रोड स्थित टैलेंट ऋतु इंसा इंस्टीट्यूट में कुछ दिन पहले सर्टिफिकेट वितरण और संस्थान की व्यवस्थाओं को लेकर हुए विवाद के बाद अब मामला नया मोड़ ले चुका है। हंगामे के बाद संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही कई छात्राएं सामने आई हैं।
रविवार सुबह करीब 11 बजे छात्राओं ने हंगामा करने वाली छात्रा की ओर से लगाए गए आरोपों को गलत बताते हुए संस्थान के पक्ष में अपनी बात रखी। छात्राओं का कहना है कि संस्थान में उन्हें कम शुल्क में बेहतर और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाता है।
छात्राओं ने बताया कि यहां सिर्फ छात्राओं के लिए अलग-अलग बैच चलाए जाते हैं, जिससे उन्हें सुरक्षित, अनुशासित और सकारात्मक माहौल में प्रशिक्षण मिलता है। उनका कहना है कि प्रशिक्षण नियमित रूप से कराया जाता है और किसी भी छात्रा को परेशानी होने पर उसका समाधान समय पर किया जाता है।
छात्राओं का आरोप है कि हाल ही में हुआ विवाद एक साजिश का हिस्सा लगता है, जिसका उद्देश्य संस्थान की छवि को खराब करना था। उन्होंने कहा कि इस घटना से वे भी परेशान हैं, क्योंकि इससे यहां प्रशिक्षण लेने वाली छात्राओं की मेहनत और संस्थान की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है।
वहीं, संस्थान के संचालक सुखराज धनकर ने भी छात्रा की ओर से लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि सभी पात्र छात्राओं को तय प्रक्रिया के अनुसार समय पर प्रमाण-पत्र दिए जाते हैं। उनका आरोप है कि संबंधित छात्रा किसी के कहने पर संस्थान में हंगामा करने पहुंची थी।
सुखराज धनकर ने बताया कि छात्रा ने आरोप लगाया था कि उसे संस्थान की प्रिंसिपल ऋतु इंसा से मिलने नहीं दिया गया, जबकि उनके अनुसार छात्रा की प्रिंसिपल के साथ कई तस्वीरें मौजूद हैं, जो इस दावे पर सवाल उठाती हैं।
संस्थान प्रबंधन के मुताबिक, टैलेंट ऋतु इंसा इंस्टीट्यूट पिछले करीब एक साल से संचालित हो रहा है। इस अवधि में 1000 से अधिक छात्राएं यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी हैं और कई छात्राओं ने अलग-अलग स्थानों पर रोजगार हासिल किया है या फिर अपना सिलाई-कढ़ाई और बुटीक का काम शुरू किया है।
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