किसान नेताओं के पुलिस वेरीफिकेशन पर राकेश टिकैत ने उठाए सवाल, बोले- दबाव में नहीं आएंगे

HIGHLIGHTS
- वेरीफिकेशन फॉर्म में बैंक खातों से जुड़ी जानकारी मांगे जाने पर आपत्ति।
- परिवार और रोजगार की जानकारी लिए जाने पर भी भाकियू ने सवाल उठाए।
- टिकैत ने पुलिस की सत्यापन प्रक्रिया के उद्देश्य को स्पष्ट करने की मांग की।
मुजफ्फरनगर में किसान नेताओं के पुलिस वेरीफिकेशन को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। टिकैत ने किसान नेताओं के घर भेजे जा रहे वेरीफिकेशन फॉर्म में बैंक खाते, रोजगार, परिवार और आपराधिक इतिहास जैसी व्यक्तिगत जानकारी मांगे जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे किसान संगठनों को डराने और दबाव बनाने की कोशिश बताया।
'पहले सरकार से जुड़े लोगों का डाटा जुटाए पुलिस'
राकेश टिकैत ने कहा कि अगर पुलिस को डाटा एकत्र करना है तो सबसे पहले थानों के आसपास रहने वाले और सरकार से जुड़े लोगों की भी पूरी जानकारी जुटाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि वे लोग अपनी जानकारी पुलिस को उपलब्ध करा देते हैं तो किसान संगठन से जुड़े लोग भी अपनी जानकारी देने पर विचार करेंगे।
टिकैत ने सवाल किया कि किसान संगठनों से जुड़े लोगों के बारे में इतनी विस्तृत जानकारी आखिर क्यों जुटाई जा रही है। उन्होंने पुलिस वेरीफिकेशन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार किसान संगठनों को दबाव में लाने का प्रयास कर रही है।
बैंक खातों और परिवार की जानकारी मांगने पर आपत्ति
भाकियू नेताओं के अनुसार, वेरीफिकेशन फॉर्म में किसान नेताओं के आपराधिक इतिहास के साथ बैंक खातों, रोजगार और परिवार से संबंधित जानकारी भी मांगी जा रही है। संगठन ने इस प्रक्रिया पर नाराजगी जताते हुए कहा कि व्यक्तिगत और आर्थिक जानकारी जुटाने का उद्देश्य स्पष्ट किया जाना चाहिए।
राकेश टिकैत ने कहा कि किसान नेताओं से इतनी विस्तृत जानकारी लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने इस प्रक्रिया को भेदभावपूर्ण बताते हुए कहा कि सभी नागरिकों के लिए नियम समान होने चाहिए।
'किसान अपना बायोडाटा लेकर थाने नहीं जाएगा'
टिकैत ने स्पष्ट कहा कि किसान अपना बायोडाटा लेकर थाने नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसान संगठनों से जुड़ी जानकारी देनी होगी तो पंचायत के माध्यम से दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि देश का संविधान एक है और कानून भी एक है। ऐसे में किसी खास वर्ग या संगठन से अलग तरीके से जानकारी जुटाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
'किसान संगठन दबाव में नहीं आएंगे'
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस वेरीफिकेशन के जरिए किसान संगठनों के बीच डर का माहौल पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसान संगठन किसी दबाव में आने वाले नहीं हैं और अपने अधिकारों की आवाज लोकतांत्रिक तरीके से उठाते रहेंगे।
भाकियू की बैठक में भी जताई नाराजगी
किसान नेताओं के पुलिस वेरीफिकेशन को लेकर भाकियू की बैठक में भी नाराजगी जताई गई। संगठन के नेताओं ने कहा कि किसान संगठनों की गतिविधियां सार्वजनिक हैं और वे अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के सामने रखते हैं।
बैठक में मांग की गई कि यदि किसान नेताओं का कोई आधिकारिक पुलिस सत्यापन कराया जा रहा है तो उसके उद्देश्य, नियम और जानकारी के इस्तेमाल की प्रक्रिया भी स्पष्ट की जाए।
अब पुलिस-प्रशासन के जवाब पर नजर
राकेश टिकैत के बयान के बाद किसान नेताओं के पुलिस वेरीफिकेशन का मुद्दा गरमा गया है। भाकियू ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अब पुलिस और प्रशासन के जवाब का इंतजार है कि सत्यापन किस उद्देश्य से कराया जा रहा है और फॉर्म में मांगी जा रही व्यक्तिगत जानकारी का इस्तेमाल किस प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
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