NIA ने सात विदेशी नागरिकों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट, UAPA की धारा हटाई

HIGHLIGHTS
- यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी दिल्ली और लखनऊ एयरपोर्ट से हुई थी
- मामले में 180 दिन तक जांच चलने की बात सामने आई है
- चार्जशीट में 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट', 2025 की धारा 21 और 23 का उल्लेख है
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने और उग्रवाद से जुड़े कैंप आयोजित करने जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े एक अमेरिकी समेत सात विदेशी नागरिकों के खिलाफ मंगलवार को चार्जशीट दाखिल की। जांच एजेंसी ने आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) की धारा 18 के तहत मामला दर्ज किया था। हालांकि, चार्जशीट में सभी आरोपियों के खिलाफ UAPA की धारा हटा दी गई है। इसमें केवल 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट', 2025 की धारा 21 और 23 का उल्लेख किया गया है। ये दोनों धाराएं फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस के स्तर पर समझौता योग्य (कंपाउंडेबल) अपराध की श्रेणी में आती हैं।
180 दिन पहले हुई थी आरोपियों की गिरफ्तारी
सुप्रीम कोर्ट के वकील रोहित डंडरियाल, जिन्होंने अदालत में आरोपियों की ओर से पक्ष रखा, ने अमर उजाला को बताया कि इस मामले में जांच एजेंसी की कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। उनके मुताबिक, आरोपियों को 180 दिन पहले गिरफ्तार किया गया था। उस समय जांच एजेंसी ने आतंकी साजिश का आरोप लगाया था।
अधिवक्ता रोहित डंडरियाल के अनुसार, उन्होंने जांच एजेंसी के सामने कहा था कि आरोपी घूमने के लिए आए थे और उनके पास सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद थे। इसके बावजूद उन्हें 30 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बाद में हिरासत की अवधि बढ़ाकर 90 दिन कर दी गई।
इस दौरान आरोपियों के वकील ने जांच एजेंसी से उन्हें रिहा करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि मामले में हर पहलू से जांच की जा चुकी है। इसके जवाब में जांच एजेंसी की ओर से कहा गया कि अभी वॉयस सैंपल समेत अन्य जांच की जानी बाकी है। एजेंसी ने इसके लिए 90 दिन का अतिरिक्त समय मांगा।
एडवोकेट रोहित डंडरियाल के मुताबिक, 180 दिन की जांच के बाद भी जांच एजेंसी को UAPA के तहत अपराध नहीं मिला। जांच एजेंसी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि चार्जशीट में UAPA की धाराएं नहीं लगाई गई हैं। वहीं, एजेंसी के वकील ने अदालत को यह भी बताया कि इस मामले में UAPA के एंगल से जांच अभी पूरी नहीं हुई है और फिलहाल इस धारा को जांच में लंबित रखा गया है।
जांच एजेंसी ने कहा कि आगे की जांच में अगर UAPA के तहत कोई अपराध सामने आता है तो NIA की ओर से सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा सकती है। 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट', 2025 की धारा 21 और 23 में तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक
NIA ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैनडाइक के अलावा छह यूक्रेनी नागरिक हुरबा पेट्रो, स्लीवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफनकिव मारियन, होंचारुक मक्सिम और कामिन्स्की विक्टर शामिल हैं। इनके खिलाफ UAPA की धारा 18 समेत कई अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
13 मार्च को अमेरिकी नागरिक वैनडाइक कोलकाता एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था। वहीं, यूक्रेन के नागरिकों को दिल्ली और लखनऊ एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था।
ट्रंप प्रशासन से की गई थी दखल की अपील
इस मामले में अमेरिकी नागरिक वैनडाइक के परिवार ने पिछले दिनों राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की थी। परिवार ने ट्रंप प्रशासन से वैनडाइक की रिहाई की मांग की थी। इसके लिए वैनडाइक की मां शेरेन वैनडाइक ने कूटनीतिक दखल देने की मांग की थी।
शेरोन वैनडाइक ने इस संबंध में एक्स पर बयान भी जारी किया था। उन्होंने कहा था कि यह उनके परिवार के लिए मानवीय संकट का समय है। एरन वैनडाइक के बारे में उन्होंने कहा कि वह संकट में फंसे लोगों की मदद करते हैं और उनका जीवन मानवीय कार्यों में ही बीता है। इसी वजह से परिवार ने अमेरिकी सरकार से एरन वैनडाइक को सुरक्षित तरीके से घर वापस लाने की अपील की है।
म्यांमार जाने से पहले मिजोरम में दाखिल होने का आरोप
इस मामले में कोर्ट को बताया गया कि सातों विदेशी नागरिक म्यांमार जाने से पहले गैर-कानूनी तरीके से मिजोरम में दाखिल हुए थे। आरोप है कि उन्होंने वहां ऐसे 'एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स' को ट्रेनिंग दी, जो भारत में सक्रिय आतंकवादी संगठनों का समर्थन करते हैं। ये समूह म्यांमार के कई विद्रोही गुटों से जुड़े थे और म्यांमार की जुंटा यानी सैन्य सरकार को निशाना बनाते हैं।
अदालत को यह भी बताया गया कि आरोपियों ने इन समूहों के सदस्यों को ड्रोन से हमला करने की ट्रेनिंग दी थी। दूसरे देशों से उपकरण लाकर ड्रोन तैयार करना भी इस प्रशिक्षण का हिस्सा था। ड्रोन के लिए उपकरण कहां से उपलब्ध कराए जाएंगे, इसमें वैनडाइक और अन्य आरोपियों की भूमिका बताई गई।
आरोप है कि इन लोगों ने म्यांमार में एक यात्री विमान को भी निशाना बनाया था। ये विदेशी नागरिक ऐसे आतंकियों के संपर्क में थे, जिनके पास एके-47 जैसे घातक हथियार थे। जांच एजेंसी ने इस संबंध में अदालत के सामने कई पुख्ता सबूत भी पेश किए। आरोपियों के फोन की फोरेंसिक जांच से भी कई अहम जानकारियां सामने आई थीं।
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