बिना दहेज और दिखावे के हुआ निकाह, मुजफ्फरनगर में दोनों परिवारों ने पेश की मिसाल

HIGHLIGHTS
- बारात जनकपुरी कच्ची सड़क निवासी ताहिर अली के घर पहुंची।
- शाम करीब 5 बजे शबाना और मुजम्मिल का निकाह हुआ।
- निकाह की रस्म मस्जिद में पूरी की गई।
मुजफ्फरनगर। जिले में हुए एक निकाह ने शादी-ब्याह में सादगी अपनाने और दहेज से दूरी रखने का संदेश दिया। सोमवार को गाजियाबाद के फरीदनगर से बारात जनकपुरी कच्ची सड़क निवासी ताहिर अली के घर पहुंची। शाम करीब 5 बजे उनकी बेटी शबाना का निकाह फरीदनगर निवासी यामीन के बेटे मुजम्मिल के साथ मस्जिद में बेहद सादगी के साथ हुआ।
निकाह में न दान-दहेज की मांग की गई और न ही शादी को भव्य बनाने के लिए अनावश्यक खर्च किया गया। बिना किसी बड़े आयोजन और दिखावे के निकाह की रस्म पूरी की गई। दोनों परिवारों ने शादी को सादगी से संपन्न करने को प्राथमिकता दी।
आज के दौर में महंगी शादियों और दहेज का खर्च कई परिवारों के लिए चिंता का कारण बन जाता है। ऐसे में इस निकाह ने यह संदेश दिया कि शादी को आर्थिक बोझ बनाए बिना भी रिश्ते की शुरुआत सरल तरीके से की जा सकती है।
विवाह में दिखावे के बजाय आपसी सम्मान और परिवारों की सहमति को प्राथमिकता दी जा सकती है। मुजम्मिल के पिता मोहम्मद यामीन ने बताया कि उन्होंने अपने पांचों बच्चों का निकाह बिना किसी दान-दहेज के किया है। उनका कहना है कि निकाह को आसान बनाया जाना चाहिए और दहेज की परंपरा से दूरी रखनी चाहिए, ताकि गरीब परिवार भी अपनी बेटियों की शादी बिना आर्थिक दबाव के कर सकें।
मुजफ्फरनगर में हुआ यह निकाह इसी सोच का उदाहरण बनकर सामने आया। सादगी से संपन्न हुए इस निकाह ने दहेज और फिजूलखर्ची से बचने के साथ विवाह को आसान बनाने का संदेश दिया।
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