इथेनोल को लेकर नितिन गडकरी का जवाब, बोले- मेरा कोई निजी हित नहीं

HIGHLIGHTS
- नितिन गडकरी ने कहा कि इथेनोल उद्योग में उनका कोई निजी हित नहीं है।
- उन्होंने बताया कि उनके बेटों के कारोबार में इथेनोल की हिस्सेदारी सीमित है और कंपनियों पर बड़ा कर्ज भी है।
- गडकरी ने इथेनोल के साथ-साथ हाइड्रोजन, मेथनॉल और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे वैकल्पिक ईंधनों का समर्थन किया।
नई दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनोल और अन्य वैकल्पिक ईंधनों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में उनका कोई व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं जुड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए वह लंबे समय से ऐसे विकल्पों को बढ़ावा देने की वकालत करते रहे हैं, जो आयातित ईंधन पर निर्भरता कम कर सकें।
एक मीडिया बातचीत के दौरान गडकरी ने कहा कि उनका समर्थन केवल इथेनोल तक सीमित नहीं है। वह हाइड्रोजन, मेथनॉल, बायोफ्यूल और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे विभिन्न स्वच्छ एवं वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को भी समान रूप से प्रोत्साहित करते हैं। उनका मानना है कि भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए इन विकल्पों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
अपने परिवार के कारोबारी हितों को लेकर उठ रहे सवालों पर गडकरी ने कहा कि उनके बेटों द्वारा संचालित व्यवसाय में इथेनोल का योगदान बहुत सीमित है। उन्होंने बताया कि परिवार की चीनी मिल पहले से संचालित हो रही है और इथेनोल से जुड़े कारोबार का हिस्सा कुल गतिविधियों का छोटा भाग है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कंपनियों पर बड़ी मात्रा में ऋण है, इसलिए यह कहना गलत होगा कि इथेनोल नीति से उन्हें कोई विशेष आर्थिक लाभ मिल रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इथेनोल मिश्रण कार्यक्रम का संचालन पेट्रोलियम मंत्रालय के स्तर पर किया जाता है और इस प्रक्रिया में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
गडकरी ने यह भी बताया कि भारत में इथेनोल उत्पादन केवल गन्ने तक सीमित नहीं है। कई राज्यों में मक्का, धान की पराली, बांस और अन्य कृषि उत्पादों से भी इथेनोल तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलते हैं और कृषि अवशेषों के बेहतर उपयोग का रास्ता भी खुलता है।
पेट्रोल और बायोफ्यूल की लागत को लेकर पूछे गए सवाल पर गडकरी ने कहा कि पारंपरिक पेट्रोल की उपलब्धता बनाए रखना संभव है, लेकिन इसकी कीमत अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। उनका कहना था कि वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग लंबे समय में उपभोक्ताओं और देश की अर्थव्यवस्था दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के कई देश जैव ईंधन और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए भी ऊर्जा के विविध स्रोत विकसित करना समय की जरूरत है।
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