सावन में चिकन-मटन दुकानें बंद कराने के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

HIGHLIGHTS
- याचिका में सावन के दौरान दुकानें बंद कराने के नोटिस को चुनौती दी गई थी।
- याची ने कांवड़ मार्ग से बाहर की दुकानों को भी बंद कराने का दावा किया।
- यूपी सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया।
सावन माह में अमरोहा में चिकन और मटन की दुकानों को बंद कराने के लिए जारी नोटिस को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दिया। अदालत ने याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता नासिर फारूक की मंशा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह याचिका पब्लिक इंटरेस्ट के बजाय पब्लिसिटी इंटरेस्ट में दाखिल की गई है।
याचिका में सावन माह के दौरान चिकन और मटन की दुकानों को बंद कराने के लिए जारी नोटिस की वैधानिकता को चुनौती दी गई थी। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने याचिका का विरोध किया।
कांवड़ मार्ग से बाहर की दुकानों को भी बंद कराने का दावा
याची की ओर से अधिवक्ता मुस्तकीम अहमद ने अदालत को बताया कि अमरोहा में कांवड़ यात्रा मार्ग से अलग स्थित चिकन की दुकानों को भी पुलिस ने बिना तारीख के नोटिस जारी कर बंद करा दिया है। उनका कहना था कि इससे बड़ी संख्या में दुकानदारों और इससे जुड़े लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
पूरे सावन दुकानें बंद कराने का आरोप
याचिका में दावा किया गया था कि नोटिस में केवल चार सोमवार को दुकानें बंद रखने का उल्लेख किया गया है, लेकिन प्रशासन की ओर से पूरे सावन माह में चिकन और मटन की दुकानें नहीं खुलने दी जा रही हैं।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि कांवड़ मार्ग के अलावा गलियों और अन्य स्थानों पर स्थित दुकानों को भी बंद कराया गया है।
अनडेटेड नोटिस रद्द करने की मांग
याची ने हाईकोर्ट से हस्तक्षेप करते हुए जारी किए गए अनडेटेड नोटिस को रद्द करने की मांग की थी। याचिका में कहा गया था कि दुकानों के बंद रहने से सैकड़ों लोगों के सामने रोजगार और आजीविका का संकट पैदा हो गया है।
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