पीएम मोदी ने मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन को बताया प्रेरणादायी

HIGHLIGHTS
- पीएम मोदी ने मोहन भागवत के संबोधन में उठाए गए प्रमुख मुद्दों की सराहना की।
- संघ प्रमुख ने पंच परिवर्तन को जीवन में व्यवहारगत बदलाव लाने वाली पहल बताया।
- नई पीढ़ी में सही और गलत की पहचान के बिना सूचनाएं ग्रहण करने पर चिंता जताई गई।
नागपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर नागपुर में आयोजित शताब्दी वर्ष के श्री विजयादशमी उत्सव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के संबोधन की सराहना की। उन्होंने इसे प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि इसमें राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के चरित्र को मजबूत बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति उस प्रतिबद्धता का उल्लेख किया, जिसे उन्होंने प्रत्येक आरएसएस स्वयंसेवक के जीवन का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. मोहन भागवत ने पंच परिवर्तन पर भी अपने विचार रखे और बताया कि ये पहल सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाने में किस तरह योगदान दे सकती हैं।
अपने संबोधन में क्या बोले संघ प्रमुख?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत शताब्दी वर्ष के श्री विजयादशमी उत्सव में शामिल होने के लिए नागपुर पहुंचे। कार्यक्रम की शुरुआत स्वयंसेवकों के पथ संचलन से हुई, जिसमें संघ प्रमुख ने भी भाग लिया।
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि समाज को अपनी विस्मृति दूर करनी होगी। इसके साथ ही उस मूल तत्व को स्पष्ट रूप से समझना और स्वीकार करना जरूरी है, ताकि जीवन के सभी क्षेत्रों में उसके अनुरूप गुणवत्ता का निर्माण किया जा सके।
उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए जितना तप और समर्पण किया गया था, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अब उससे भी अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है।
पंच परिवर्तन और नई पीढ़ी को लेकर चिंता
डॉ. मोहन भागवत ने पंच परिवर्तन की पांच पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व बोध व स्वदेशी और नागरिक अनुशासन को समाज के विभिन्न वर्गों और स्तरों पर स्वीकार किया गया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के दूसरे देशों में भी इन पहलों की जरूरत महसूस की गई है।
संघ प्रमुख के अनुसार, पंच परिवर्तन केवल एक साल तक चलने वाला कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह जीवन के आचरण में बदलाव लाने वाली व्यवहार शैली है।
नई पीढ़ी के बारे में चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि युवा विभिन्न माध्यमों से मिलने वाली जानकारियों को उचित और अनुचित का विवेक किए बिना ग्रहण कर लेते हैं। इसके दुष्परिणाम सामने आने के बाद कई देशों ने कुछ नियम और प्रतिबंध लागू किए हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में भी इस तरह की जरूरत महसूस की जा रही है, विशेष रूप से ओटीटी प्लेटफॉर्म के संदर्भ में। इस विषय पर शासन और प्रशासन को विचार करना चाहिए।
पर्यावरण संतुलन, सामाजिक सद्भाव और नशे की समस्या पर जोर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने विजयादशमी के दिन की थी। इस वर्ष संगठन अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर रहा है।
शताब्दी वर्ष के अवसर पर नागपुर के रेशिमबाग मैदान में सरसंघचालक मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया और संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को पुष्पांजलि अर्पित की।
अपने संबोधन में भागवत ने हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए विकास करने, सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने और सोशल मीडिया पर उपलब्ध सूचनाओं का विवेकपूर्ण उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने नशे की समस्या को भी गंभीर राष्ट्रीय चुनौती बताते हुए सरकार और समाज से मिलकर इसके समाधान के लिए प्रयास करने की अपील की।
आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने पर पीएम मोदी ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस पर स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संघ की 100 वर्षों की यात्रा को सेवा, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सद्भाव का उल्लेखनीय शतक बताया।
एक्स पर साझा की गई पोस्ट में प्रधानमंत्री ने उन लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने वर्षों तक संगठन को आगे बढ़ाने में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ समाज की सेवा की है।
पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि सेवा की यह भावना आगे भी देश के विकास को मजबूती प्रदान करती रहेगी।
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