इटली में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक, मेलोनी बोलीं- विरोध करना अधिकार, शहरों को आग के हवाले करना नहीं

HIGHLIGHTS
- पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन किया, लेकिन हिंसा को अस्वीकार्य बताया।
- मिलान में दुकानों के शीशे तोड़े गए और एक निर्माण स्थल में आग लगाने की घटना सामने आई।
- मिलान में करीब 12 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया और लगभग 50 लोगों को हिरासत में लिया गया।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने देश के कई प्रमुख शहरों में महंगाई के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं की सख्त आलोचना की है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन राजनीतिक हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी कर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वालों और हिंसा में शामिल लोगों के बीच अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों के अपनी बात रखने और विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं उन हजारों लोगों का बहुत सम्मान करती हूं, जिन्होंने आज शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया। इनमें ट्रेड यूनियन सीजीआईएल के आह्वान पर जुटे लोग भी शामिल थे। इस प्रदर्शन में वामपंथी नेता भी शामिल हुए। प्रदर्शन का मुद्दा चाहे कुछ भी हो, इसमें भागीदारी किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र की बुनियाद है।"
मिलान और बोलोन्या में हिंसा, सुरक्षा बलों पर हमले
मेलोनी के अनुसार, देश के कई शहरों में कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले अधिकारियों को हमलों और तोड़फोड़ का सामना करना पड़ा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को एहतियाती कदम उठाने पड़े।
उन्होंने कहा, "दूसरी ओर, हम इटली के अन्य शहरों में हुई घटनाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते। मिलान में सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंके गए, अधिकारी घायल हुए और हिंसा तथा तोड़फोड़ के कारण जुलूस रोकना पड़ा। ट्यूरिन में कुछ लोगों को पत्थर और खिड़कियां तोड़ने में इस्तेमाल होने वाले हथौड़ों के साथ रोका गया। बोलोन्या में हिंसा के कारण रेलवे स्टेशन को एहतियातन बंद करना पड़ा।"
प्रधानमंत्री ने हिंसा में शामिल लोगों को ऐसे उपद्रवी बताया, जो प्रदर्शनों की आड़ में अराजकता फैलाते हैं, सुरक्षा व्यवस्था संभालने वालों पर हमला करते हैं और शहरों में आम जनजीवन को बाधित करते हैं। उन्होंने कहा, "प्रदर्शन करना अधिकार है। हमारे शहरों को आग के हवाले करना नहीं।"
विपक्षी दलों से हिंसा की निंदा करने की अपील
इटली की प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं से सड़क पर होने वाली हिंसा के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में अस्पष्ट रवैया सार्वजनिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
मेलोनी ने कहा, "मैं विपक्ष से फिर अपील करती हूं कि इस मामले में अस्पष्ट रुख न अपनाएं। हिंसा की इन घटनाओं की स्पष्ट रूप से निंदा करें और यह संदेश दें कि हर प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी घटनाओं के खिलाफ सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। उनके मुताबिक, इस मुद्दे पर किसी भी तरह की हिचकिचाहट हिंसा को सही ठहराने का आधार बन सकती है और इस मामले में चुप रहना स्वीकार्य नहीं है।
महंगाई, कम वेतन और सार्वजनिक सेवाओं के मुद्दे पर प्रदर्शन
इतालवी प्रसारक राय न्यूज के मुताबिक, शनिवार को देश के कई शहरों में बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत के विरोध में प्रदर्शन आयोजित किए गए। मिलान में ही पांच हजार से अधिक लोग जुटे। छात्र-नेतृत्व वाले इस आंदोलन का आह्वान 'इटली इन द स्क्वायर' समिति ने किया था।
प्रदर्शनकारियों ने महंगाई में बढ़ोतरी, कम वेतन, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पर्याप्त धन की कमी और सरकारी स्कूलों की खराब होती स्थिति को लेकर विरोध जताया। उन्होंने सरकार की नीतियों के खिलाफ भी आवाज उठाई।
राय न्यूज के अनुसार, मिलान के पियाजा डुओमो इलाके में स्थिति बिगड़ गई। हिंसा में शामिल लोगों ने दुकानों के शीशे तोड़ दिए, पास के एक निर्माण स्थल में आग लगा दी और वाया ब्रोलेटो में पुलिस अधिकारियों की ओर आतिशबाजी फेंकी।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद दंगा नियंत्रण पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए कार्रवाई की। इस दौरान करीब 12 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जबकि लगभग 50 लोगों को हिरासत में लेकर पुलिस मुख्यालय पहुंचाया गया।
बोलोन्या में केंद्रीय रेलवे स्टेशन के पास झड़पें
बोलोन्या में हिंसा की घटनाएं मुख्य रेलवे स्टेशन के आसपास हुईं। राय न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, हुड पहने युवाओं के एक समूह ने पियाजा मेडालिए डी ओरो स्थित केंद्रीय रेलवे स्टेशन को निशाना बनाया।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर, कांच की बोतलें, धुएं वाले बम और धातु के अवरोधक फेंके। इस दौरान सार्वजनिक किराये पर उपलब्ध कई साइकिलें भी गिरा दी गईं।
पुलिस और काराबिनिएरी बलों ने दंगा नियंत्रण उपकरणों के साथ स्थिति संभालने की कोशिश की। स्टेशन की ओर जाने वाले रास्तों को बंद करने और भीड़ को हटाने के लिए पानी की बौछारों तथा आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, झड़पों के बाद कम से कम सात लोगों को हिरासत में लिया गया।
फ्रांस में भी महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग
महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत के विरोध में फ्रांस में भी देशव्यापी प्रदर्शन हुए। फ्रांस 24 के अनुसार, पेरिस समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और उनकी सरकार को निशाने पर लिया।
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि देशभर में करीब 5.5 लाख लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। इस दौरान पुलिस ने लगभग 400 लोगों को गिरफ्तार किया।
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