अजय देवगन के जुहू बंगले पर चला BMC का बुलडोजर, अनधिकृत निर्माण पर कार्रवाई

HIGHLIGHTS
- बंगला मुंबई की कपोल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में स्थित है।
- बीएमसी के अनुसार, निर्माण में बिना मंजूरी दीवारों, खिड़कियों और अन्य हिस्सों में बदलाव किए जा रहे थे।
- काम रोकने के लिए 10 सितंबर 2026 को नोटिस जारी किया गया था।
मुंबई। अभिनेता अजय देवगन के जुहू स्थित बंगले में किए गए कथित अनधिकृत निर्माण पर बीएमसी ने कार्रवाई की है। नगर निकाय की टीम ने बंगले के अंदरूनी हिस्से में हुए निर्माण को बुलडोजर से तोड़ दिया। यह कार्रवाई कपोल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में स्थित 7,802 वर्ग फुट के बंगले में बिना अनुमति किए जा रहे बदलावों और निर्माण कार्यों को लेकर की गई।
बीएमसी ने जारी किया था नोटिस
बीएमसी के मुताबिक, बंगले के अंदर आवश्यक मंजूरी के बिना सिपोरेक्स ब्लॉक का इस्तेमाल करके दीवारों, खिड़कियों और अन्य ढांचागत हिस्सों में बदलाव किए जा रहे थे। इस मामले में बीएमसी के बिल्डिंग प्रपोजल विभाग ने मुंबई महानगरपालिका अधिनियम, 1888 की धारा 354ए के तहत 10 सितंबर 2026 को काम रोकने का नोटिस जारी किया था।
देवगन परिवार की ओर से जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा गया था। हालांकि, निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी कोई दस्तावेज या जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया और निर्माण कार्य जारी रहा। इसके बाद बीएमसी की टीम ने मौके पर पहुंचकर बिना अनुमति किए जा रहे निर्माण को तोड़ने की कार्रवाई की।
बंगले के व्यावसायिक इस्तेमाल से शुरू हुआ विवाद
यह विवाद बंगले को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की योजना के बाद शुरू हुआ। 10 अगस्त 2026 को देवगन परिवार ने बंगले को 'फ्लोरियन हुरेल सैलून्स प्राइवेट लिमिटेड' को पांच साल के लिए लीज पर दिया था। यह सौदा 10 करोड़ 61 लाख रुपये में हुआ था और शुरुआती मासिक किराया 16 लाख रुपये तय किया गया था।
बंगले में व्यावसायिक सैलून और स्पा खोलने की योजना थी। कपोल सोसाइटी के निवासी इसका लगातार विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि आवासीय क्षेत्र में सैलून खुलने से ट्रैफिक, पार्किंग और सुरक्षा से जुड़ी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
सोसाइटी ने कानूनी मंजूरी दिखाने के लिए दिया था समय
सोसाइटी के अनुसार, 22 जुलाई 2026 को वीणा वीरेंद्र देवगण और अजय (विशाल) देवगन को बंगला केवल किराए यानी लीव-एंड-लाइसेंस पर देने के लिए एनओसी दी गई थी। यह अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल या ढांचागत बदलावों के लिए नहीं थी।
सोसाइटी ने देवगन परिवार को कानूनी मंजूरी से जुड़े दस्तावेज दिखाने के लिए 15 दिन का समय दिया था। लेकिन कोई वैध दस्तावेज नहीं मिलने पर सोसाइटी ने 8 सितंबर को बीएमसी में शिकायत दर्ज कराई। साथ ही, महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम, 1966 की धारा 43 और 52 से 54 के तहत कार्रवाई करने की मांग की थी।
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