सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट: लोकसभा के 251 और राज्यसभा के 75 सांसदों पर आपराधिक मामले

HIGHLIGHTS
- 2025 में 1,243 आपराधिक मामलों का निपटारा हुआ, जबकि 1,050 नए मामले दर्ज हुए।
- लोकसभा के 170 सदस्यों पर गंभीर आपराधिक मामले बताए गए हैं।
- राज्यसभा के 40 सदस्यों के खिलाफ गंभीर मामले दर्ज हैं।
राजनीति के अपराधीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि लोकसभा के 543 में से 251 सदस्यों और राज्यसभा के 233 में से 75 सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे की मांग वाली जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट के न्याय मित्र नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया की ओर से दाखिल हलफनामे में यह जानकारी दी गई है।
हलफनामे के मुताबिक, सांसदों और विधायकों के खिलाफ 4,000 से ज्यादा आपराधिक मामले लंबित हैं। इसमें बताया गया है कि 28 में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। इनमें गंभीर मामले भी शामिल हैं।
किस मुख्यमंत्री पर सबसे ज्यादा आपराधिक मामले?
आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ 89 मामले दर्ज हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ 29 और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के खिलाफ 19 मामले हैं।
हंसारिया ने कहा कि मामलों की जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों की निगरानी के बावजूद 2018 से सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की संख्या लगभग उसी स्तर पर बनी हुई है।
न्याय मित्र ने विभिन्न उच्च न्यायालयों से जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 2025 में 1,243 आपराधिक मामलों का निपटारा हुआ, जबकि इसी साल 1,050 नए मामले दर्ज किए गए। उन्होंने अदालत को बताया कि पूर्व और मौजूदा सांसदों के साथ विधायकों के खिलाफ कुल 4,192 मामले लंबित हैं।
सांसदों के खिलाफ कितने गंभीर आपराधिक मामले?
हलफनामे में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि लोकसभा के 543 सदस्यों में से 251 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 170 मामले गंभीर आपराधिक मामलों की श्रेणी में हैं, जिनमें पांच साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है।
वहीं, राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 यानी 33 प्रतिशत सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले हैं। इनमें 40 यानी 18 प्रतिशत मामले गंभीर आपराधिक मामले हैं, जिनमें पांच साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने विभिन्न उच्च न्यायालयों की ओर से दाखिल रिपोर्टों का विश्लेषण भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा। इसमें उत्तर प्रदेश को शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय से रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई थी।
केरल में 95 फीसदी सांसदों पर आपराधिक मामले
हलफनामे के अनुसार, केरल के 20 में से 19 सांसदों यानी 95 प्रतिशत के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 11 सांसदों के खिलाफ गंभीर मामले हैं।
तेलंगाना के 17 में से 14 सांसदों यानी 82 प्रतिशत, ओडिशा के 21 में से 16 यानी 76 प्रतिशत, झारखंड के 14 में से 10 यानी 71 प्रतिशत और तमिलनाडु के 39 में से 26 यानी 67 प्रतिशत सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले हैं।
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों में करीब 50 प्रतिशत सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले हैं।
हरियाणा के 10 सांसदों और छत्तीसगढ़ के 11 सांसदों में से एक-एक के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। पंजाब के 13 में से दो, असम के 14 में से तीन, दिल्ली के सात में से तीन, राजस्थान के 25 में से चार, गुजरात के 25 में से पांच और मध्य प्रदेश के 29 में से नौ सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले हैं।
विशेष अदालतों में जल्द सुनवाई की मांग
न्याय मित्र ने कहा कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की जल्द सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट को इन मामलों की निगरानी करनी चाहिए। उन्होंने निर्देश देने की मांग की कि सांसदों और विधायकों के मामलों के लिए निर्धारित विशेष अदालतें केवल उन्हीं मामलों की सुनवाई करें। इन मामलों की सुनवाई पूरी होने के बाद ही अन्य मामलों को लिया जाए।
हंसारिया ने यह भी अनुरोध किया कि उच्च न्यायालय इन मामलों की बारीकी से निगरानी करें और जहां मामले तीन साल से अधिक समय से लंबित हैं, वहां प्रभावी आदेश जारी किए जाएं।
विजय हंसारिया, सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों के जल्द निपटारे के लिए अश्विनी उपाध्याय की ओर से दाखिल जनहित याचिका में अदालत की सहायता कर रहे हैं।
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