ऋषिकांता सिंह ने रचा इतिहास, ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को दिलाया रजत पदक

HIGHLIGHTS
- ऋषिकांता सिंह ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में पुरुष 60 किग्रा भारोत्तोलन में रजत पदक जीता।
- क्लीन एंड जर्क के दो असफल प्रयासों के बावजूद उन्होंने 264 किग्रा कुल वजन के साथ पोडियम पर जगह बनाई।
- मणिपुर के ऋषिकांता ने भारतीय सेना के सहयोग और रिकॉर्ड प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई।
ग्लास्गो। कई बार खेल में जीत से ज्यादा मायने रखता है आखिरी दम तक संघर्ष करना और हार न मानना। ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के भारोत्तोलक ऋषिकांता सिंह ने इसी जज्बे का प्रदर्शन किया। क्लीन एंड जर्क में लगातार दो प्रयास नाकाम रहे और स्वर्ण पदक का मौका हाथ से निकल गया, लेकिन उनके चेहरे पर निराशा की जगह संतोष नजर आया। वजह थी कि भारत के खाते में राष्ट्रमंडल खेलों का दूसरा पदक आ चुका था।
पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में ऋषिकांता सिंह ने रजत पदक जीतकर साबित किया कि बड़े खिलाड़ी दबाव के समय भी देश का मान बढ़ाते हैं।
दो असफल प्रयासों के बाद भी पोडियम पर पहुंचे ऋषिकांता
मणिपुर के इस युवा भारोत्तोलक ने स्नैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए 121 किलोग्राम वजन उठाया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में उन्होंने पहले प्रयास में 143 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया।
स्वर्ण पदक की उम्मीद बनाए रखने के लिए ऋषिकांता ने दूसरे प्रयास में 148 किलोग्राम और तीसरे प्रयास में 151 किलोग्राम वजन उठाने की कोशिश की, लेकिन दोनों प्रयास सफल नहीं हो सके।
इसके बावजूद उनका कुल वजन 264 किलोग्राम (121+143) रहा, जो उन्हें रजत पदक दिलाने के लिए काफी था।
मलयेशिया के मोहम्मद अनिक ने स्नैच में 121 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 152 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 273 किलोग्राम के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच, क्लीन एंड जर्क और कुल वजन तीनों में राष्ट्रमंडल खेलों के नए रिकॉर्ड बनाए।
ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का यह दूसरा पदक रहा। इससे पहले पैरा पावरलिफ्टिंग में झंडू कुमार ने कांस्य पदक जीतकर भारत का खाता खोला था।
मणिपुर से निकला एक और भारोत्तोलन सितारा
भारोत्तोलन में मणिपुर का नाम हमेशा खास रहा है। मीराबाई चानू जैसी दिग्गज खिलाड़ी देने वाली इस धरती ने ऋषिकांता सिंह के रूप में एक और प्रतिभाशाली खिलाड़ी तैयार किया है।
इंफाल वेस्ट के रहने वाले ऋषिकांता बचपन से ही भारोत्तोलन में रुचि रखते थे। प्रतिभा होने के बावजूद उसे सही दिशा देने के लिए बेहतर मंच की जरूरत थी।
उन्हें यह अवसर भारतीय सेना के खेल ढांचे में मिला, जहां अनुशासन, आधुनिक प्रशिक्षण और सुविधाओं ने उनके खेल को नई पहचान दी।
रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ पहुंचे राष्ट्रमंडल खेलों तक
ऋषिकांता ने 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में 55 किलोग्राम वर्ग से अपने अंतरराष्ट्रीय सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने वजन वर्ग बदला और 60/61 किलोग्राम वर्ग में अपनी पहचान बनाई।
2024 राष्ट्रीय भारोत्तोलन चैंपियनशिप में उन्होंने 61 किलोग्राम वर्ग के स्नैच में 124 किलोग्राम वजन उठाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया।
इसके बाद 2025 राष्ट्रमंडल भारोत्तोलन चैंपियनशिप में उन्होंने 120 किलोग्राम स्नैच, 151 किलोग्राम क्लीन एंड जर्क और कुल 271 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता।
यह कुल वजन भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बना और इसी प्रदर्शन के दम पर उन्होंने लगातार दूसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों में जगह बनाई।
रजत पदक भी स्वर्ण से कम नहीं
ग्लास्गो में भले ही ऋषिकांता सिंह स्वर्ण पदक से चूक गए, लेकिन उनका रजत पदक संघर्ष, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति की कहानी है। आखिरी दो प्रयास असफल होने के बाद भी उन्होंने खुद को संभाला और पोडियम पर तिरंगा पहुंचाया।
यह पदक सिर्फ एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं है, बल्कि मणिपुर के एक युवा के उस सफर की कहानी है, जिसमें भारतीय सेना के सहयोग से वह देश के भरोसेमंद भारोत्तोलकों में शामिल हुए।
अब उनकी नजरें एशियाई खेलों और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर होंगी, जहां ऋषिकांता सिंह भारत के लिए और बड़ी उपलब्धियां हासिल करने की कोशिश करेंगे।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.