'शशि थरूर ने माना महिला विरोधी है कांग्रेस': किरेन रिजिजू का बड़ा दावा

HIGHLIGHTS
- केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
- उन्होंने दावा किया कि थरूर की एक टिप्पणी से यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस महिलाओं के मुद्दों पर स्पष्ट रुख नहीं रखती।
- यह बयान उस समय सामने आया जब संसद में प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पारित नहीं हो सका, जिसका उद्देश्य लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना था।
- रिजिजू का दावा और बातचीत का जिक्र समाचार एजेंसी से बातचीत में रिजिजू ने बताया कि संसद सत्र के बाद उनकी थरूर से मुलाकात हुई थ…
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि थरूर की एक टिप्पणी से यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस महिलाओं के मुद्दों पर स्पष्ट रुख नहीं रखती। यह बयान उस समय सामने आया जब संसद में प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पारित नहीं हो सका, जिसका उद्देश्य लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना था।
रिजिजू का दावा और बातचीत का जिक्र
समाचार एजेंसी से बातचीत में रिजिजू ने बताया कि संसद सत्र के बाद उनकी थरूर से मुलाकात हुई थी। उनके मुताबिक, इस दौरान थरूर ने हल्के अंदाज में कहा कि भले ही उनकी पार्टी पर महिला विरोधी होने के आरोप लगें, लेकिन व्यक्तिगत रूप से उन्हें कोई ऐसा नहीं मानता। रिजिजू ने इस टिप्पणी को कांग्रेस की सोच का संकेत बताते हुए उस पर सवाल उठाए।
रिजिजू ने कहा कि उन्होंने थरूर को जवाब देते हुए साफ किया कि व्यक्तिगत छवि अलग हो सकती है, लेकिन पार्टी के रुख को लेकर सवाल बने हुए हैं। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर केवल राजनीतिक बयान देती है, जबकि ठोस कदम उठाने में पीछे रहती है।
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे मामले की शुरुआत उस समय हुई जब 18 अप्रैल को शशि थरूर ने रिजिजू के साथ अपनी एक तस्वीर साझा की थी। पोस्ट में थरूर ने लिखा था कि उन्होंने रिजिजू को यह विश्वास दिलाया कि उन्हें महिला विरोधी नहीं कहा जा सकता, और इस बात को मंत्री ने स्वीकार भी किया था। अब रिजिजू ने उसी बातचीत का अलग पहलू सामने रखकर कांग्रेस पर हमला बोला है।
महिला आरक्षण विधेयक पर मतभेद
विवाद के केंद्र में महिला आरक्षण से जुड़ा प्रस्तावित विधेयक है। सरकार का कहना है कि 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए पहले निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन जरूरी है। वहीं कांग्रेस का तर्क है कि वह महिलाओं को आरक्षण देने के पक्ष में है, लेकिन इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ना विशेषकर दक्षिण भारत के राज्यों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
विधेयक पारित न हो पाने पर रिजिजू ने विपक्षी दलों की आलोचना करते हुए कहा कि यह एक महत्वपूर्ण अवसर था, जिसे गंवा दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि देश की महिलाएं इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों के रुख को जरूर याद रखेंगी।
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