भारत से 3 लाख लोगों को जापान भेजने की तैयारी, प्रशिक्षण के बाद मिलेगा रोजगार

HIGHLIGHTS
- जापान में कामगारों की कमी को देखते हुए प्रस्ताव सामने आया
- भारत या जापान में दिया जा सकता है प्रशिक्षण
- भाषा प्रशिक्षण और कौशल प्रमाणन की होगी जरूरत
जापान अब भारत को केवल अपने लिए एक बाजार के तौर पर नहीं देख रहा, बल्कि वहां से कामगारों की जरूरत भी पूरी करना चाहता है। जापानी पक्ष ने तीन लाख भारतीय तकनीशियनों, प्रबंधकों, देखभालकर्मियों और परिचरिकाओं को प्रशिक्षण देकर जापान में रोजगार देने का प्रस्ताव रखा है। इन लोगों को प्रशिक्षण भारत या जापान, किसी भी जगह दिया जा सकता है। हालांकि, रोजगार जापानी अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए होगा।
यह प्रस्ताव वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के चार दिवसीय जापान दौरे के दौरान सामने आया। इससे संकेत मिलता है कि भारत और जापान के आर्थिक संबंध अब निवेश और व्यापार से आगे बढ़कर मानव संसाधन पर भी केंद्रित हो सकते हैं। जापान में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी के कारण अस्पतालों, वृद्धाश्रमों, कारखानों और निर्माण क्षेत्र में कामगारों की कमी हो रही है।
भारत के लिए यह एक बड़ा अवसर हो सकता है, लेकिन इसके साथ कुछ शर्तें भी जुड़ी हैं। तीन लाख लोगों को जापान भेजने के लिए भाषा प्रशिक्षण, कौशल प्रमाणन और दोनों देशों के बीच योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता की पूरी व्यवस्था तैयार करनी होगी। यदि यह व्यवस्था तैयार होती है तो जापान भारत के लिए निवेश के साथ रोजगार का भी बड़ा बाजार बन सकता है। ऐसा नहीं होने पर यह पहल भी बैठकों के बाद होने वाली उन घोषणाओं तक सीमित रह सकती है, जो कागजों से आगे नहीं बढ़ पातीं।
व्यापार घाटे पर दो टूक, भारत को अपनी गुणवत्ता सुधारनी होगी
गोयल के जापान दौरे के दौरान व्यापार घाटे को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हुई। भारतीय पक्ष को उम्मीद थी कि जापान अपने आयात नियमों में कुछ ढील देगा, प्रमाणन प्रक्रिया को आसान बनाएगा और भारतीय उत्पादों के लिए बाजार का रास्ता थोड़ा और खुल सकता है। लेकिन जापान की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया कि वह भारत के लिए अपने मानकों में बदलाव नहीं करेगा, क्योंकि ये मानक किसी एक देश को ध्यान में रखकर बनाए ही नहीं गए हैं।
जापान का कहना है कि उसके मानक सभी देशों से आने वाले उत्पादों पर समान रूप से लागू होते हैं। इसी तरह भारत के मानक भी सभी आयातकों के लिए एक समान हैं। इसका सीधा मतलब है कि व्यापार घाटे को कम करने के लिए भारत को अपने स्तर पर प्रयास करना होगा। जापानी बाजार में भारतीय उत्पादों को जगह रियायत के आधार पर नहीं, बल्कि जापानी गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरकर हासिल करनी होगी।
गुणवत्ता ही असली प्रवेश शुल्क: गोयल
आयात नियमों में नरमी की उम्मीद पर पीयूष गोयल ने साफ कहा कि कोई भी देश दूसरे देश के लिए अपने नियम नहीं बदलता। उनके अनुसार, जैसे-जैसे जापानी कंपनियां भारत में उत्पादन बढ़ाएंगी, भारतीय उद्योग में गुणवत्ता को लेकर सोच भी बदलेगी। इससे निर्यात के अवसर बढ़ने का रास्ता तैयार होगा।
गोयल ने यह भी माना कि सेमीकंडक्टर और जहाज निर्माण जैसे कुछ क्षेत्रों में जापान की बढ़त अभी कायम रहेगी।
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