'लादेन को दी पनाह': UN में भारत ने शहबाज शरीफ के दावों पर किया पलटवार, कश्मीर पर भी घेरा

HIGHLIGHTS
- पेटल गहलोत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल किया।
- उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के भाषण को लेकर प्रतिक्रिया दी।
- गहलोत ने 9/11 हमले की 25वीं बरसी का भी संदर्भ दिया।
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने राइट टू रिप्लाई के जरिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बयान पर जवाब दिया। उन्होंने सिंधु जल संधि और कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर पाकिस्तान को कड़ा प्रत्युत्तर दिया।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में राइट टू रिप्लाई के दौरान भारतीय मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का संबोधन “बेतुकी बयानबाजी” से भरा हुआ था। उन्होंने कहा कि महासभा ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि की ओर से कुछ बेहद अजीब टिप्पणियां सुनीं। यह उस समय हुआ, जब न्यूयॉर्क और पूरी दुनिया ने करीब दो सप्ताह पहले 9/11 आतंकी हमले की 25वीं बरसी मनाई थी।
लादेन को पनाह देने को लेकर पाकिस्तान पर निशाना
पेटल गहलोत ने कहा कि 9/11 हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सेना की प्रतिष्ठित अकादमी के ठीक पास रह रहा था। उन्होंने कहा कि जिस संस्था की पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने महासभा में प्रशंसा और चापलूसी की, उससे जुड़ा यह तथ्य सामने है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लोग जिस सरकार को खुद फॉर्म 47 की सरकार कहते हैं, उससे इस तरह की बातें सुनना आश्चर्यजनक नहीं है।
भारतीय राजनयिक ने आगे कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों और मानव मूल्यों पर ऐसे शासन से पाखंडी उपदेश सुनने को मिले, जिसकी राजधानी इस समय अपने ही लोगों से बचाने के लिए किले में तब्दील की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सेना की, सेना द्वारा और सेना के लिए चलने वाली सरकार है। उनके मुताबिक कठपुतली शासक आते-जाते रह सकते हैं, लेकिन असली फैसले कौन लेता है, इसे लेकर भ्रम नहीं होना चाहिए।
'दिन में शांति की बात, रात में आतंकवाद'
पेटल गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान की वास्तविकता उसके 27वें संशोधन और उसके वास्तविक शासक को दी गई आजीवन छूट से सामने आती है। उन्होंने कहा कि महासभा में सुने गए विचार ऐसे लोगों की ओर से आए, जिनका कट्टरता और नफरत का लंबा रिकॉर्ड रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान दिन में सुरक्षा और शांति की बात करता है, लेकिन रात में आतंकवाद को अंजाम देता है।
धार्मिक असहिष्णुता को लेकर पाकिस्तान की ओर से की गई टिप्पणियों पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। गहलोत ने कहा कि जिस शासन की बुनियाद ईशनिंदा कानूनों पर टिकी है, उसके द्वारा ऐसे मुद्दों पर टिप्पणी की गई। उन्होंने कहा कि दुनिया पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले व्यवहार से परिचित है और कोई भी धार्मिक या नैतिक उपदेश दुनिया को गुमराह नहीं कर सकता।
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया
भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का जिक्र किए जाने पर पेटल गहलोत ने कहा कि यह भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा।
उन्होंने कहा कि अगर कश्मीर का मुद्दा उठाना ही है तो ध्यान पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की ओर होना चाहिए। उन्होंने रावलकोट के लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि वे लंबे समय से मनमानी हत्याओं, हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने का सामना कर रहे हैं।
गहलोत ने कहा कि इस पूरे मुद्दे के केंद्र में पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद को लंबे समय से जारी रखने की नीति है।
ऑपरेशन सिंदूर का भी किया जिक्र
पेटल गहलोत ने कहा कि भारत ने पिछले साल दिखा दिया था कि आतंकवादियों के पास न भागने की जगह होगी और न छिपने की। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेगा और पाकिस्तान की ओर से जारी आतंकवाद के परिणाम होंगे।
उन्होंने कहा कि इससे उन संबंधों पर भी सवाल उठेंगे, जिन्हें मित्रता और सद्भावना की भावना पर आधारित माना जाता था।
अंत में गहलोत ने कहा कि भारत को विश्वास है कि महासभा पाकिस्तान और उसकी नीतियों को उसी रूप में देखेगी, जैसी वे वास्तव में हैं, न कि उस रूप में जैसा पाकिस्तान का प्रतिनिधि उन्हें पेश करता है। उन्होंने कहा कि साल-दर-साल झूठ दोहराने से वे सच नहीं हो जाते और पाकिस्तान का आतंकवाद, छल तथा दोहरा रवैया न तो उसके लिए और न ही दुनिया के लिए किसी लाभ का कारण बनेगा।
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