इस्तीफे से पहले धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का सुझाव, CJP ने किया था खारिज

HIGHLIGHTS
- धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले सरकार ने CJP के साथ बातचीत में उनका मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव रखा था।
- सूत्रों के अनुसार, CJP प्रतिनिधियों ने मंत्रालय बदलने के सुझाव को खारिज कर दिया था और इस्तीफे की मांग पर कायम रहे।
- तीन दौर की बातचीत के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार के फैसलों के बाद जंतर-मंतर का आंदोलन खत्म हुआ।
पेपर लीक मामले और तत्कालीन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के धरना-प्रदर्शन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव दिया गया था। सूत्रों के अनुसार, CJP के प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को जिम्मेदारी दी गई थी। दोनों पक्षों के बीच तीन दौर की बातचीत हुई। हालांकि, तीसरे दौर की बैठक से कुछ समय पहले ही धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद हुई बैठक में जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को खत्म करने का फैसला लिया गया।
मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव किया गया था
सूत्रों के मुताबिक, बातचीत के दौरान जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP के सामने धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का सुझाव रखा था। सरकार की ओर से बातचीत कर रहे नेताओं का कहना था कि किसी मंत्री को हटाना या उसका विभाग बदलना प्रधानमंत्री का अधिकार है। हालांकि, CJP प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई।
CJP की प्रमुख मांगों में शामिल था इस्तीफा
कॉकरोच जनता पार्टी की कई मांगों में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा प्रमुख मांगों में शामिल था। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने और NEET पेपर लीक मामले में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग भी रखी गई थी।
दूसरे दौर की बातचीत के बाद प्रदर्शनकारियों ने कहा था कि सरकार सैद्धांतिक रूप से दो मांगों पर सहमत हो गई है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या उन्हें हटाने के मुद्दे पर सहमति नहीं बनी थी।
विट्ठलभाई पटेल भवन में हुई थी बैठक
प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत और समाधान के प्रयासों के तहत केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने दिल्ली के विट्ठलभाई पटेल भवन में CJP प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका के साथ बैठक की थी। यह बैठक करीब दो घंटे तक चली थी।
पिछले सप्ताह शुक्रवार को हुई दूसरे दौर की बातचीत में CJP ने केंद्र सरकार से कहा था कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
वहीं, जेपी नड्डा ने कहा था कि मंत्रियों ने CJP की सभी मांगें सुनी हैं और आगे उनसे संपर्क किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया था कि दोनों पक्षों के बीच शनिवार को फिर बातचीत होगी।
प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर माफी की मांग
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले सरकार की ओर से दो अहम कदम उठाए गए थे। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को पेपर लीक से जुड़े मामलों में कड़ी सजा के प्रावधान वाले विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी थी।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात जारी वीडियो संदेश में कहा था कि पेपर लीक रोकने के लिए एक विधेयक अगले सप्ताह सोमवार को संसद में लाया जाएगा।
CJP ने भारत सरकार, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के प्रमुख और दिल्ली पुलिस आयुक्त से 20 जुलाई को प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित कार्रवाई के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी की थी।
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