रूस से जुड़े प्रतिबंध कानून पर ट्रंप की मुहर, भारत-चीन पर टैरिफ की आशंका

HIGHLIGHTS
- ट्रंप ने शुक्रवार को कानून पर हस्ताक्षर किए।
- रूस के ऊर्जा क्षेत्र को कानून में निशाना बनाया गया है।
- वित्तीय संस्थानों और रक्षा नेटवर्क पर भी प्रावधान लागू होंगे।
नई दिल्ली। अमेरिका ने भारत के साथ संबंधों की परवाह किए बिना रूस से जुड़े एक बिल को मंजूरी दे दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया।
इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर राष्ट्रपति को 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है। कानून में रूस के ऊर्जा क्षेत्र, वित्तीय संस्थानों, रक्षा नेटवर्क और प्रतिबंधों से बचने के तरीकों को निशाना बनाया गया है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, इसके जरिए रूस पर पहले से लागू प्रतिबंधों को और कड़ा किया गया है।
भारत और चीन पर पड़ सकता है असर
इस बिल के तहत ट्रंप को रूसी तेल और गैस के बड़े खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिला है। संभावित रूप से इसमें चीन और भारत भी शामिल हो सकते हैं। इसका मकसद रूस के युद्ध के लिए वित्तीय मदद देने वाले राजस्व को कम करना है।
रिपब्लिकन नेतृत्व वाली प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को 262-159 वोटों से इस पैकेज को मंजूरी दी थी। इस बिल के दायरे में रूसी सैन्य सहायता करने वाली कंपनियों और विदेशी तत्वों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा ईरान से जुड़े प्रतिबंधों का भी विस्तार किया गया है।
टैरिफ लगाने के व्यापक अधिकारों को लेकर डेमोक्रेट्स के बीच असामान्य विभाजन देखने को मिला। डेमोक्रेट्स यूक्रेन का समर्थन करते हैं, लेकिन ट्रंप को व्यापार के मामले में अधिक अधिकार देने का विरोध कर रहे थे।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इससे पहले कानून के पारित होने को प्रतीकात्मक बताया था और अमेरिकी सांसदों का आभार जताया था। वहीं, भारत ने गुरुवार को कहा कि वह ‘विविध स्रोतों’ के जरिए तेल की खरीद जारी रखेगा।

Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.