यूपीआई शुल्क की चर्चा से अलीगढ़ के बाजारों में हलचल, दुकानदारों ने हटाए QR कोड

HIGHLIGHTS
- रसलगंज और महावीरगंज समेत कई बाजारों में असर दिखा।
- कुछ दुकानदारों ने ग्राहकों से नकद भुगतान करने को कहा।
- व्यापार मंडल ने आपात बैठक में आंदोलन का फैसला लिया।
अलीगढ़। यूपीआई भुगतान पर शुल्क की नई व्यवस्था को लेकर अलीगढ़ के बाजारों में इसका असर दिखाई देने लगा है। बुधवार को रसलगंज, जयगंज, महावीर गंज, रेलवे रोड, घंटाघर, रामघाट रोड और दुबे का पड़ाव समेत कई बाजारों में दुकानदार क्यूआर कोड हटाने और नकद भुगतान लेने की बात करते नजर आए। महावीरगंज के एक किराना दुकानदार ने ग्राहकों से साफ कहा कि पहले कैश लाओ, फिर सामान ले जाना। इसी तरह तालानगरी सेक्टर एक में चाय स्टॉल और दुबे का पड़ाव में फल विक्रेताओं ने भी यूपीआई से भुगतान लेने से इनकार किया।
दरअसल, केंद्र सरकार ने आगामी 15 अक्तूबर से दो हजार रुपये तक के व्यक्ति से व्यापारी को होने वाले यूपीआई भुगतान को शुल्क मुक्त रखने और इससे अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने की व्यवस्था घोषित की है। इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है।
महीने में एक लाख रुपये से कम यूपीआई भुगतान लेने वाले कारोबारियों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। हालांकि, अलीगढ़ के दुकानदारों ने इसे लेकर नाराजगी जताई है। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने आपात बैठक कर आंदोलन करने का फैसला भी लिया। यह जानकारी कुछ ही समय में शहर के लगभग सभी बाजारों तक पहुंच गई, जिसके बाद कई दुकानों से क्यूआर कोड हटाए जाने लगे।
व्यापारियों ने जताई नई व्यवस्था पर चिंता
दुबे का पड़ाव स्थित कपड़ा बाजार के व्यापारी प्रेम अरोरा ने कहा कि ऑनलाइन भुगतान की वजह से पहले ही कारोबार प्रभावित हो रहा है। उनके मुताबिक, अगर कोई ग्राहक पांच हजार रुपये की खरीदारी करता है तो एमडीआर का भार भी व्यापारी पर पड़ेगा।
महावीरगंज के किराना कारोबारी पवन कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि व्यापारी थोक बाजार से सामान खरीदने के लिए भी ऑनलाइन भुगतान करते हैं। त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है, ऐसे में नई व्यवस्था से उनकी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
नकद भुगतान पर जोर से ग्राहकों की परेशानी बढ़ने की आशंका
रेलवे रोड पहुंचने पर कचौड़ी विक्रेता सुरेश ने बताया कि उनके यहां नकद की तुलना में ऑनलाइन भुगतान ज्यादा आता है। उनका कहना है कि ग्राहक बाजार में ज्यादा नकद लेकर नहीं आते। ऐसे में क्यूआर कोड हटने पर ग्राहकों और दुकानदारों दोनों को भुगतान का तरीका बदलना पड़ेगा।
'मेरी आदत बन गई यूपीआई, अब रखना पड़ेगा पर्स'
रसलगंज में एक दुकान से दवाएं खरीद रहे श्याम नगर निवासी राजेंद्र कुमार ने कहा कि यूपीआई भुगतान उनकी आदत बन चुका है। वह घर से बिना पर्स के निकलते हैं और इससे पर्स चोरी या गिरने का डर भी नहीं रहता। उन्होंने कहा कि दिल्ली में सरकार ने फैसला लिया है और एक ही दिन में दुकानों पर इसका असर दिखाई देने लगा है।
राजेंद्र कुमार ने कहा कि अब उन्हें रोज घर से निकलते समय पर्स रखने का तनाव रहेगा। इसी तरह मानिक चौक निवासी पंकज ने कहा कि अब जेब में ज्यादा नकद रखने की जरूरत नहीं पड़ती। छोटी से लेकर बड़ी खरीदारी तक मोबाइल से भुगतान हो जाता है, लेकिन अब उनके जैसे ग्राहकों को नकद का इंतजाम भी करना पड़ेगा।
ग्राहकों को एटीएम से नकद निकालने की जरूरत बढ़ सकती है
व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई भुगतान ने खरीदारी को आसान बनाया है। कई ग्राहक बिना नकद के बाजार पहुंचते हैं और मोबाइल से भुगतान कर देते हैं। यदि दुकानदार क्यूआर कोड हटा देते हैं तो ग्राहकों को खरीदारी से पहले नकद की व्यवस्था करनी होगी। इससे एटीएम से रुपये निकालने की जरूरत बढ़ सकती है।
फैसला वापस नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने यूपीआई लेन-देन पर कर लगाने के प्रस्ताव का विरोध किया है। संगठन ने इसे डिजिटल इंडिया की भावना के खिलाफ बताते हुए कहा कि यदि प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप गंगा ने कहा कि यह छोटे और मझोले व्यापारियों के साथ अन्याय होगा। व्यापारियों ने प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए यूपीआई को अपनाया है।
संगठन के अनुसार, गली-कूचे के छोटे दुकानदारों ने भी बिना झिझक डिजिटल भुगतान स्वीकार किया है। ऐसे में यूपीआई पर कर लगाना व्यापारियों के साथ धोखा होगा। प्रदेश संगठन मंत्री हरिकिशन अग्रवाल ने कहा कि कर लगाने से कारोबार प्रभावित होगा और अर्थव्यवस्था में नकद लेन-देन बढ़ सकता है। उन्होंने सरकार से प्रस्ताव वापस लेने की मांग की।
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