अब गांव वाले भी रख सकेंगे सरकारी कामों पर नजर, जी-रामजी योजना में नई व्यवस्था लागू

HIGHLIGHTS
- विकसित भारत जी-रामजी योजना में मनरेगा जैसे कार्यों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है, जिसमें ग्रामीणों को भी निगरानी का अधिकार मिलेगा।
- हर कार्यस्थल पर जनता सूचना बोर्ड लगाया जाएगा, जिसमें योजना की लागत, स्वीकृत राशि, काम की अवधि और मजदूरों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होगी।
- सोशल ऑडिट के साथ डिजिटल रिकॉर्ड की मदद से फर्जी कार्यों, कागजी प्रगति और भुगतान में गड़बड़ियों पर रोक लगाने की तैयारी की गई है।
नई दिल्ली। मनरेगा में फर्जी काम, कागजों में दिखाई गई प्रगति और भुगतान से जुड़ी अनियमितताओं को रोकने के लिए विकसित भारत जी-रामजी योजना के तहत निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।
इस नई व्यवस्था में सिर्फ सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि ग्रामीण भी योजनाओं के कामकाज पर सीधे नजर रख सकेंगे। कार्यों और खर्च में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तीन स्तरों पर निगरानी प्रणाली तैयार की गई है।
सरकारी कामों की जानकारी अब जनता के सामने होगी
सरकार ने योजना में जनभागीदारी को पहले से अधिक प्रभावी बनाने की व्यवस्था की है। प्रत्येक कार्यस्थल पर जनता सूचना बोर्ड लगाया जाएगा, जिसमें योजना की लागत, स्वीकृत धनराशि, कार्य अवधि, मजदूरों की संख्या और अन्य जरूरी जानकारियां सार्वजनिक की जाएंगी।
ग्रामीण सोशल ऑडिट और डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से यह जांच सकेंगे कि कार्य निर्धारित तरीके से हो रहा है या नहीं और कहीं धन का दुरुपयोग तो नहीं किया जा रहा है।
जनता सूचना बोर्ड से मिलेगी पूरी जानकारी
नई व्यवस्था में जनता सूचना बोर्ड को अहम भूमिका दी गई है। अब योजनाओं से जुड़ी जानकारी केवल सरकारी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहेगी। बोर्ड पर परियोजना की कुल लागत, मंजूर राशि, काम शुरू होने और पूरा होने की तारीख के साथ-साथ मजदूरों की संख्या और मानव-दिवस की जानकारी भी दर्ज करनी होगी।
इससे ग्रामीणों को योजना से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
अगर किसी बोर्ड पर सौ मजदूरों के काम करने की जानकारी दी गई है, जबकि गांव के लोगों को पता है कि वास्तव में इतने मजदूर काम पर नहीं आए, तो वे इस पर सवाल उठा सकेंगे।
इसी तरह अगर किसी काम को रिकॉर्ड में पूरा दिखाया गया है, लेकिन मौके पर वह अधूरा है, तो उसकी जानकारी भी सामने आ सकेगी।
सोशल ऑडिट के साथ डिजिटल रिकॉर्ड भी जुड़ेगा
योजना में सोशल ऑडिट की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी, लेकिन इसे अधिक प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड को भी शामिल किया गया है।
सोशल ऑडिट के तहत ग्रामसभा, ग्रामीण और स्वतंत्र सोशल ऑडिट टीम मिलकर यह जांच करेंगे कि स्वीकृत कार्य वास्तव में हुआ है या नहीं, मजदूरी सही लाभार्थियों को मिली है या नहीं और खर्च का रिकॉर्ड जमीनी स्थिति से मेल खाता है या नहीं।
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