आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं, अंतरिम जमानत देने से इनकार; केयरटेकर रखने की अनुमति

HIGHLIGHTS
- सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य आधार पर दाखिल याचिका पर फिलहाल फैसला सुरक्षित नहीं रखा
- एम्स की रिपोर्ट में अस्पताल में भर्ती की जरूरत नहीं बताई गई थी
- अदालत ने भविष्य में स्वास्थ्य बिगड़ने पर दोबारा आने की छूट दी
नई दिल्ली। नाबालिग से दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम जमानत देने से मना कर दिया है। हालांकि, अदालत ने उन्हें अपनी पसंद का एक प्रशिक्षित केयरटेकर रखने की अनुमति दे दी है, जो 24 घंटे उनकी चिकित्सा संबंधी जरूरतों का ध्यान रख सकेगा।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत की मांग वाली आसाराम की याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे फिलहाल लंबित रखा। अदालत ने कहा कि अगर भविष्य में उनकी स्वास्थ्य स्थिति और खराब होती है तो वह दोबारा अदालत का रुख कर सकते हैं।
सरकार ने पैरोल आवेदन का मुद्दा उठाया
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आसाराम ने यह जानकारी छिपाई है कि उनके वकील की ओर से पहले पैरोल के लिए आवेदन किया गया था।
इस पर आसाराम के वकील ने कहा कि पैरोल की अर्जी पहले दाखिल की गई थी, लेकिन वह स्वास्थ्य कारणों के आधार पर नहीं थी।
एम्स रिपोर्ट में नहीं बताई गई अस्पताल में भर्ती की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट को पहले जानकारी दी गई थी कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के विशेषज्ञों की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार आसाराम को अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, उन्हें 24 घंटे चिकित्सा सहायता और देखभाल की जरूरत है।
इसी रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने उन्हें प्रशिक्षित केयरटेकर रखने की अनुमति दी है। इससे पहले 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने एम्स को मेडिकल बोर्ड गठित कर आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति की जांच करने का निर्देश दिया था।
राजस्थान हाईकोर्ट दे चुका है 20 दिन की पैरोल
इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम को 20 दिन की पैरोल दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार पैरोल आवेदन खारिज करने के पर्याप्त कारण नहीं बता सकी।
अदालत ने उनकी उम्र, लंबे समय से जेल में रहने और पहले मिली अंतरिम रिहाई के दौरान उनके व्यवहार को ध्यान में रखते हुए यह राहत दी थी।
दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा बरकरार
राजस्थान हाईकोर्ट ने 27 मई को 2013 में नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।
हालांकि, अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो कानून के तहत कुछ आरोपों से उन्हें बरी कर दिया था। लेकिन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376(2)(एफ) के तहत नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा कायम रखी गई थी।
इसके अलावा हाईकोर्ट ने गलत तरीके से बंधक बनाने, मानव तस्करी, आपराधिक धमकी, महिला की गरिमा का अपमान, यौन उत्पीड़न, पॉक्सो अधिनियम की धाराओं और किशोर न्याय अधिनियम के तहत उनकी दोषसिद्धि को भी बरकरार रखा था।
2018 में सुनाई गई थी सजा
आसाराम को 25 अप्रैल 2018 को अपने आश्रम की एक नाबालिग छात्रा से यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया गया था। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें भारतीय दंड संहिता, पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
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