बिहार में शिक्षकों का आंदोलन तेज है। नई शिक्षक नियुक्ति नियमावली कैबिनेट से पास होने के बाद शिक्षकों के बड़े वर्ग में आक्रोश है। भास्कर ने माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव और पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह से खास बातचीत की।
जवाब- बिहार सरकार ने बिना शिक्षक संघ से विचार-विमर्श किए और यहां तक कि महागठबंधन के घोषणा पत्र पर ध्यान दिए बिना एकतरफा बिहार राज्य प्राध्यापक नियमावली 2023 को 10 अप्रील को अधिसूचित किया है। उसमें पूर्व से कार्यरत तीन से चार लाख शिक्षकों की घोर उपेक्षा की गई है। उनकी सेवा क्या होगी?
आयोग की ओर से आयोजित परीक्षा में सरकार ने कहा भाग लीजिए, तो क्या 17 वर्षों की नियुक्ति की वरीयता समाप्त होगी? क्या यह पूरी तरह से नई नियुक्ति होगी? क्या नया वेतनमान होगा? यह जो छलपूर्ण व्यवहार है बिहार सरकार का, उससे न केवल माध्यमिक बल्कि उच्च माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षकों में भी आक्रोश है।
जवाब- दो बातें हैं। ये वेतनमान तो किसी तरह से सरकारी है ही नहीं। सातवें वेतन आयोग द्वारा अनुशंसित और लागू वेतनमान तो कहीं से शिक्षकों के लिए लागू ही नहीं है। नियोजित शिक्षकों को जो वेतन अभी दिया जा रहा है वह जैसे कृपा दिखाते हुए दे दिया गया है। वह सरकारी नहीं है।
वेतन का प्रारंभिक 9300 से होना चाहिए। हमारे प्ल्स टू के शिक्षक मूल वेतन 30 हजार पर हैं। शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है सरकार। आज तक किसी प्रकार की प्रोन्नति भी सरकार ने नहीं दी है। ऐसी कोई सरकारी नौकरी नहीं देश में जिन्हें प्रोन्नति नहीं दी गई है। बिहार में शिक्षकों के साथ शोषण है।
जवाब- देखिए ये सरकार आम लोगों को गुमराह करने के लिए बहाना कर रही है कि पहले के शिक्षक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दे रहे हैं। मेरा सीधा आरोप है कि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने ही नहीं देती है फिर भी हम शिक्षक दे रहे हैं। सरकार सालों भर शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य करवाती है। साल भर में नौ-दस महीने यही सब होता है। अभी विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई बाधित कर सरकार जाति गणना करवा रही है। उसके बाद पशु गणना करवाएगी। फिर आर्थिक गणना करवायेगी। इसके बाद जो 10 साल में सेंसेक्स होता है वह करवाएगी। 2024-25 चुनाव के लिए जो मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य होगा वह करवाएगी।
मतदान की प्रक्रिया से मतगणना तक और उससे अलग विद्यालय परीक्षा समिति सालों भर परीक्षा लेती रहती है। फॉर्म भरो, परीक्षा लो। सरकार तो शिक्षकों को पढ़ाने ही नहीं देती है। हमलोग गैर शैक्षणिक कार्यों का विरोध करते हैं। इन बाधाओं के बावजूद हमारे पढ़ाए गए बच्चे इंजीनियर, आईएएस, आईपीएस हैं। लेक्चरर डाइट में हमारे बीच के ही शिक्षक बहाल हुए हैं। काफी दिनों से छल का व्यवहार सरकार कर रही है। हमको दुश्मन के रूप में मानना छोड़ दीजिए मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री जी। शिक्षक जाग चुके हैं। हमलोग रोज परीक्षा देते हैं, लोगों को गुमराह न करें को हम परीक्षा से भाग रहे हैं।
जवाब- नई नियमावली के विरोध में मजदूर दिवस के दिन आयोजित आंदोलन हमारे 38 जिलों में सफल हुआ। हमारे साथ अन्य प्राथमिक शिक्षक संघ और एआईएसएफ भी साथ हैं। सरकार को हमने समय दिया है सोचने के लिए। अभी तो डीएम के जरिए ज्ञापन दिया गया है। यदि 19 मई तक सरकार सम्मानजनक वार्ता शिक्षकों से नहीं करेगी तो प्रमंडल मुख्यालय के समक्ष गंभीर प्रतिरोध होगा। उसके बाद 22 मई से प्रतिदिन धरना का कार्यक्रम जिला मुख्यालयों में होगा। जुलाई में विधान मंडल के सत्र में 'घेरा डालो आंदोलन' होगा।
जवाब- एकदम आर-पार की लड़ाई है। जब तक बिना शर्त राज्यकर्मी का दर्जा शिक्षकों को सरकार नहीं देगी, हमारा आंदोलन बंद नहीं होने वाला है। इसका परिणाम जो हो। इसकी सारी जिम्मेदारी सरकार की होगी।