बिहार में विपक्ष की भूमिका निभा रहा राष्ट्रीय जनता दल लगातार नीतीश सरकार पर हमला बोल रहा है। विशेष राज्य के मुद्दे पर पहले राजद के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने एनडीए सरकार पर हमला बोला। सीएम नीतीश कुमार से इस्तीफ तक मांग लिया। अब राजद के प्रवक्ताओं ने प्रेस कांफ्रेंस कर नीतीश सरकार को फेल बता दिया है। इतना ही नहीं राजद नेताओं ने लालू-राबड़ी और नीतीश राज की तुलना भी कर दी। आंकड़ा जारी कर बताया कि  भाजपा और जदयू के नेता झूठ और दुष्प्रचार को हथियार बना कर सत्ता में आये और फर्जी आंकड़े पेश कर लोगों को गुमराह करते आ रहे हैं। पर वे तथ्यों और सही आंकड़ों पर बहस नहीं कर सकते ।

अब तो घर के अंदर भी लोग अपने को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे
राजद के प्रदेश कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन, मृत्युंजय तिवारी एवं आरजू खान ने कहा कि भाजपा और जदयू के नकारात्मक और दुष्प्रचार की राजनीति का खमियाजा आज बिहार को भुगतना पड़ रहा है। कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। सुशासन सरकार और पुलिस हुक्मरानों द्वारा अपराध नियंत्रण पर हर दावे और उच्च स्तरीय समीक्षा के बाद भी राज्य में हत्या, अपहरण, लूट, डकैती, छेड़खानी और बलात्कार की एक श्रृंखला सी बन गई है। अब तो घर के अंदर भी लोग अपने को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। राह चलते सरेआम गोली मार दी जा रही है, विद्यालय का कैम्पस भी अछूता नहीं रहा।

नीतीश सरकार में क्राइम रेट 108 से बढ़कर 224 तक पहुंच गई
राजद प्रवक्ताओं ने कहा कि राज्य की वर्तमान सरकार की बुनियाद ही दुष्प्रचार, झूठे दावे और नकारात्मक सोच पर टिकी हुई। 1990 में लालू प्रसाद जी जब बिहार के मुख्यमंत्री बने थे उस समय बिहार का क्राइम रेट 145 था और जब राबड़ी देवी जी 2005 में मुख्यमंत्री पद छोड़ी उस समय बिहार का क्राइम रेट 108 था। स्पष्ट है कि राजद शासन काल में आपराधिक घटनाओं में भारी गिरावट दर्ज की गई। बिहार में जब एनडीए की सरकार बनी तो क्राइम रेट 108 से बढ़कर 224 तक पहुंच गई। वास्तविक स्थिती तो यह है कि राजद शासनकाल की तुलना मे एनडीए शासनकाल में सभी प्रकार के अपराधों में तीन से चार गुना की बढोत्तरी हुई है। विशेष कर महिलाओं के खिलाफ अपराध में तो अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।

राजद के 22 की तुलना में एनडीए काल में 28 मामले औसतन प्रतिदिन दर्ज हुए
राजद प्रवक्ताओं ने कहा कि बिहार सरकार और एनसीआरबी के आंकड़ों को ही आधार मान लिया जाए तो राजद शासनकाल मे प्रतिघंटा औसत 11 संज्ञेय अपराध दर्ज होते थे वहीं एनडीए की सरकार में दर्ज होने वाली संज्ञेय अपराध की संख्या प्रतिघंटा औसत 21 यानी राजद शासनकाल से लगभग दुगुना हो गया। बलात्कार की घटनाओं में सौ प्रतिशत बढोत्तरी के साथ प्रतिदिन 4 मामले दर्ज हुये जबकी राजद शासनकाल में प्रतिदिन का औसत 2 है।

राजद शासनकाल में प्रतिदिन अपहरण की औसतन 4 घटनाएं दर्ज हैं वहीं एनडीए शासनकाल में चैगुना वढोत्तरी के साथ प्रतिदिन औसत 16 घटनायें दर्ज हुईं है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि राजद शासनकाल में रिकवरी रेट जहां 97 प्रतिशत था वहीं एनडीए शासनकाल में वह घटकर 43 प्रतिशत हो गया यानी 57 प्रतिशत अपहृतों की हत्या कर दी गई। सरकारी आंकड़े के अनुसार, एनडीए शासनकाल में औसतन प्रतिदिन 9 लोगों की हत्या कर दी जाती है। राजद शासनकाल में चोरी की घटना प्रतिदिन औसत के हिसाब से जहां 28 है वहीं एनडीए शासनकाल में 58 यानी दुगुना से भी ज्यादा है। दंगा-फसाद के मामले भी राजद के 22 की तुलना में एनडीए काल में 28 मामले औसतन प्रतिदिन दर्ज हुए हैं।

अपने भार से बिहार की जनता को मुक्त कर दे एनडीए सरकार
राजद प्रवक्ता ने कहा कि अपनी कमजोरी और नाकामियों को छुपाने के लिए भाजपा और जदयू के नेता सोलह साल पूर्व की सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। यह तो राजद शासनकाल की हीं देन थी कि अबतक हुए सभी नरसंहारों के  अभियुक्तों को निचली अदालतों से सजा दिया गया। पर एनडीए सरकार द्वारा उच्च न्यायालय में सही ढंग से अपना पक्ष नहीं रखने के कारण सभी अभियुक्त दोषमुक्त हो गये। चितरंजन गगन ने कहा कि हालात अब नियंत्रण से बाहर जा चुके हैं। सरकार का एकवाल अब समाप्त है। एनडीए सरकार के लिए बेहतर होगा कि वह अपने भार से बिहार की जनता को मुक्त कर दे। इस दौरान प्रदेश महासचिव संजय यादव, मदन शर्मा, मो0 फैयाज आलम कमाल, बल्ली यादव, निर्भय अम्बेदकर, प्रमोद कुमार राम सहित अन्य उपस्थित थे।