नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में पानी और सीवर कनेक्शन लेने के लिए उपभोक्ताओं को भारी-भरकम आधारभूत ढांचा शुल्क (IFC) का भुगतान करना पड़ता है। पहले की आप सरकार ने वर्ष 2020 में निर्णय लिया था कि हर साल 1 अप्रैल को इस शुल्क में 5 प्रतिशत की वृद्धि होगी।

अब रेखा गुप्ता सरकार ने इस शुल्क में राहत देने की योजना बनाई है। नीति में बदलाव के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू करने के लिए IFC का सिर्फ 25 प्रतिशत भुगतान करना होगा, जबकि शेष राशि बाद में जमा कराई जा सकेगी।

जल बोर्ड की बैठक में स्वीकृति

जल मंत्री प्रवेश वर्मा की अध्यक्षता में हुई जल बोर्ड की बैठक में IFC से संबंधित नई नीति को मंजूरी दी गई। इस कदम से निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं को दूर करने में मदद मिलेगी।

उपभोक्ताओं और एजेंसियों को होंगे ये फायदे

अब भवन परियोजना स्वीकृति के समय उपभोक्ता और निर्माण एजेंसी केवल 25 प्रतिशत IFC का भुगतान करके अस्थायी एनओसी (NOC) प्राप्त कर सकेंगे। शेष राशि को पानी के कनेक्शन की अंतिम स्वीकृति के समय लागू दरों के अनुसार समायोजित किया जाएगा।

प्रवेश वर्मा ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में IFC शुल्क में लगातार वृद्धि होने के कारण कई संपत्ति मालिक एनओसी नहीं प्राप्त कर पा रहे थे, जिससे निर्माण कार्य में देरी हो रही थी। उन्होंने कहा कि यह सुधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ विज़न के अनुरूप है। उनका उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि न्यायसंगत और संतुलित प्रणाली बनाना है।

इसके अलावा, 200 वर्ग मीटर तक की संपत्तियां IFC शुल्क से मुक्त रहेंगी। बड़े भूखंडों के लिए भी संशोधित और तर्कसंगत ढांचे के अनुसार शुल्क में कटौती की योजना तैयार की जा रही है।

आइएफसी शुल्क दरें (₹ प्रति वर्ग फुट)

पानी कनेक्शन:

संपत्ति श्रेणीABC-DE-H
वाणिज्यिक446.70319.07191.45127.63
आवासीय255.27191.45127.6363.81
संस्थागत319.07255.27159.5495.72

सीवर कनेक्शन:

संपत्ति श्रेणीABC-DE-H
वाणिज्यिक268.03191.45114.87-
आवासीय153.16114.8776.5738.29
संस्थागत191.45153.1695.7257.42