चंडीगढ़। जब दिल्ली, हरियाणा और पूरे एनसीआर क्षेत्र वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं, तब मिनी फॉरेस्ट यानी छोटे शहर वन (इको-वन) की पहल ने एक नई उम्मीद जगाई है।
इको-वन परियोजना में शहर के खाली, अपयोगी और गंदे स्थलों को हरियाली से सजाया जा रहा है। यहां फूल-पौधे, रंग-बिरंगी तितलियां, नगर वन, ऑक्सीवन और हर्बल पार्क बनाए गए हैं। यह केवल सजावट नहीं, बल्कि एक पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की सोच है।
हरियाणा सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत शहरी निकाय, नागरिक उड्डयन तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल के नेतृत्व में फरीदाबाद से की। वर्तमान में फरीदाबाद में 12 इको-वन तैयार किए जा चुके हैं। परियोजना पूरी तरह जनभागीदारी पर आधारित है और बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सीधे प्रकृति से जोड़ने का लक्ष्य रखती है।
फरीदाबाद में लगभग 500 मिनी फॉरेस्ट विकसित किए जाने का लक्ष्य है। ये छोटे वन ऐसे स्थानों पर बनाए जा रहे हैं जो पहले कचरे और उपेक्षित स्थानों के रूप में जाने जाते थे। आगे चलकर पूरे हरियाणा में इस परियोजना का विस्तार किया जाएगा।
विपुल गोयल के अनुसार, इन मिनी फॉरेस्टों में केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे इको-सिस्टम को विकसित किया गया है। छोटे जल-क्षेत्र, घास के मैदान और घने वृक्षों के संयोजन से पक्षियों, उभयचरों और परागण करने वाले कीटों को अपने प्राकृतिक आवास लौट सके। भूजल पुनर्भरण भी इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
शहरी क्षेत्र में जैव-विविधता लौटाना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। यह न केवल पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि शहरी जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाता है। बच्चों के लिए ये स्थल प्रकृति की सीख का केंद्र बन गए हैं, बुजुर्गों के लिए शांति का कोना और पूरे समुदाय के लिए गर्व का कारण।
मंत्री गोयल ने बताया कि सरकारी दिशा के साथ-साथ इस परियोजना की सफलता नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर है। जब समुदाय किसी हरित स्थल को अपना मानता है, तब ही वह स्थायी बनता है। यही जनभागीदारी इस परियोजना की आत्मा है।