गुरुग्राम में प्रस्तावित मेट्रो परियोजना का एक अहम हिस्सा—पालम विहार, सेक्टर-22/23, ज्वाला मिल, उद्योग विहार फेज-IV से होते हुए ओल्ड दिल्ली रोड को एनएच-8 से जोड़ने वाला मार्ग—नागरिकों, पूर्व सैनिकों और सुरक्षा विशेषज्ञों में चिंता का कारण बन गया है।

यह मार्ग केवल व्यस्त सड़क ही नहीं, बल्कि एक रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र से होकर गुजरता है। मार्ग के पास सैन्य प्रतिष्ठान, गोला-बारूद डिपो, फायरिंग रेंज और कैंटोनमेंट क्षेत्र स्थित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एलिवेटेड मेट्रो बनने पर इन सुरक्षा प्रतिष्ठानों की दृश्यता बढ़ सकती है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ने का खतरा है।

पूर्व सैनिक परिवारों पर प्रभाव

गुरुग्राम और आसपास के क्षेत्रों में अनुमानित 70,000 से अधिक पूर्व सैनिक और उनके परिवार निवास करते हैं। रोजाना करीब 10,000–15,000 बुजुर्ग पूर्व सैनिक इसी मार्ग से ECHS पॉलीक्लिनिक और CSD कैंटीन जैसी सुविधाओं तक पहुंचते हैं। मौजूदा भारी ट्रैफिक के कारण 4 किलोमीटर की दूरी तय करने में लगभग 40 मिनट लग जाते हैं, जिससे वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी असुविधा होती है।

एलिवेटेड मेट्रो से ट्रैफिक संकट बढ़ सकता है

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मार्ग पर मेट्रो को एलिवेटेड बनाया गया, तो सड़क की उपयोगी चौड़ाई घट जाएगी। निर्माण कार्य के दौरान लंबे समय तक ट्रैफिक जाम, एम्बुलेंस और स्कूल बसों की परेशानी, दुर्घटनाओं की संभावना और वरिष्ठ नागरिकों के लिए असुविधा बढ़ेगी।

भूमिगत मेट्रो: सुरक्षित और व्यावहारिक विकल्प

पूर्व में यह सुझाव दिया गया था कि उद्योग विहार फेज-IV और सैन्य क्षेत्र के पास लगभग 1 किलोमीटर का हिस्सा भूमिगत रखा जाए। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा बनी रहेगी, ट्रैफिक प्रभावित नहीं होगा, वरिष्ठ नागरिकों को राहत मिलेगी और यह शहरी नियोजन के लिए दीर्घकालिक रूप से बेहतर साबित होगा।

मुख्यमंत्री जनसंवाद में उठाया मुद्दा

Major (Dr.) T.C. Rao ने मुख्यमंत्री जनसंवाद (प्री-बजट बैठक) में इस विषय को उठाया। मुख्यमंत्री हरियाणा ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए विचार करने का आश्वासन दिया। इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा गया है।

जनहित में मांग

नागरिकों, पूर्व सैनिक संगठनों और सामाजिक प्रतिनिधियों की मांग है कि पालम विहार–उद्योग विहार–सैन्य क्षेत्र वाले संवेदनशील हिस्से में मेट्रो को एलिवेटेड के बजाय भूमिगत बनाया जाए। यह केवल सुविधा का मुद्दा नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और दूरदर्शी विकास नीति से जुड़ा मामला है।