देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को माता वैष्णो देवी के दरबार पहुंचीं। राष्ट्रपति दोपहर करीब 12 बजे पंछी हेलीपैड पर उतरीं। यहां उनका स्वागत श्राइन बोर्ड के सीईओ अंशुल गर्ग और पुलिस के आला अधिकारियों ने किया। उनके साथ उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी मौजूद हैं। महामहिम ने मां वैष्णो देवी भवन पर बने स्काईवॉक व नवदुर्गा पथ को जनता को समर्पित किया। इसके बाद माता के दर्शन के लिए रवाना हुईं।
माता वैष्णो देवी भवन पर भीड़भाड़ से बचने के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त स्काईवॉक बनाया गया है। इसे डेढ़ साल में 15 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। इसमें मां दुर्गा के नौ रूपों को प्रतिबिंबित किया गया है जिसे नव दुर्गा पथ नाम दिया गया है। प्रवेश द्वार पर 60 मीटर लंबी गुफा बनाई गई है ताकि श्रद्धालुओं को मां वैष्णो देवी की प्राचीन गुफा का अहसास हो सके।
प्रत्येक 100 मीटर की दूरी पर यात्रियों के लिए प्रतीक्षा हॉल का निर्माण किया गया है। स्काईवॉक के एक ओर शीशा लगाया गया है ताकि श्रद्धालुओं को भवन के दर्शन होते रहें। स्काईवॉक से एक समय में छह हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंच सकेंगे। इसे ट्रैक से 20 मीटर की ऊंचाई पर बनाया गया है।
भवन के प्रवेश द्वार पर बने स्काईवॉक का नवदुर्गा पथ शारदीय नवरात्र पर भक्तों का स्वागत करेगा और इसकी कलात्मकता उनको अनूठा अनुभव प्रदान करेगी। इसके दोनों ओर मां वैष्णो देवी के नौ रूपों की मूर्तियां सुसज्जित की गई हैं। इसके साथ ही माता वैष्णो देवी के श्लोक तथा मंत्र आदि अंकित किए गए हैं, ताकि भक्ति पूर्ण वातावरण बना रहे।

माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्डवैष्णो देवी भवन में श्रद्धालुओं का अवागमन व्यवस्थित करने के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्काईवॉक परियोजना का प्रस्ताव रखा था। स्काईवॉक सतह से 20 फीट ऊपर होगा और मनोकामा भवन और गेट नंबर 3 के बीच श्रद्धालुओं को यात्रा में सुगमता प्रदान करेगा।

स्काईवाक फ्लाईओवर में लकड़ी की फ्लोरिंग की गई है। इससे नंगे पांव चलने में दिक्कत नहीं होगी। फ्लाईओवर में शीशे लगे हैं। इससे मां के दर्शन होने के साथ ठंड से भी बचाव होगा। रास्ते में जगह-जगह एलईडी स्क्रीन लगे हैं, जिससे भवन के दर्शन और सुबह-शाम की आरती देख सकते हैं।