जोधपुर में माहेश्वरी समाज के महाकुंभ (MGC-2026) का आयोजन शुरू हो चुका है। शनिवार को कार्यक्रम के दूसरे दिन देश के गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए और समाज के योगदान पर प्रकाश डालते हुए संबोधन दिया।
माहेश्वरी समाज के योगदान की सराहना
अमित शाह ने कहा कि माहेश्वरी समाज हमेशा नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला समाज रहा है। समाज से निकले हुए रत्नों ने देश को हर क्षेत्र में उज्जवल बनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के लोग उच्च पदों पर पहुँचने के बाद भी अपने मूल और परंपरा से जुड़े रहते हैं, और यही माहेश्वरी समाज की खास पहचान है।
आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उत्पाद
गृह मंत्री ने उपस्थित लोगों से अपील करते हुए कहा कि जितना संभव हो, स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करें। उन्होंने बताया कि 2014 में जब मोदी जी प्रधानमंत्री बने, तब भारत की अर्थव्यवस्था विश्व में 11वें स्थान पर थी, और 11 साल में भारत चौथे स्थान पर आ गया। अगले वर्ष भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। शाह ने कहा कि स्वदेशी का मतलब केवल उत्पाद नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का दूसरा पहलू भी है।
आयोजन और भागीदारी
इस महाकुंभ में भारत सहित दुनिया के 27 देशों से लगभग 40,000 माहेश्वरी समाज के सदस्य हिस्सा ले रहे हैं। आयोजन के लिए पॉलिटेक्निक कॉलेज स्थित 250 बीघा क्षेत्र में अस्थायी शहर का निर्माण किया गया है।
राम मंदिर और समाज का योगदान
अमित शाह ने माहेश्वरी समाज का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक योगदान भी याद दिलाया। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद राम मंदिर के लिए प्राणों की आहुति देने वाले पहले लोग माहेश्वरी समाज से थे। शाह ने कहा कि देश की सेवा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण में समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गृह मंत्री ने कहा कि भारत को हर क्षेत्र में सर्वप्रथम लाने के लिए तीन प्रमुख कदम जरूरी हैं, जिनमें माहेश्वरी समाज अग्रणी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि समाज को उत्पादन करने के साथ-साथ उन वस्तुओं का उत्पादन करना चाहिए, जो भारत में नहीं बनती, और इस तरह देश के विकास में योगदान देना चाहिए।
अमित शाह ने यह भी कहा कि जब समाज के बड़े आयोजन होते हैं, तो कई प्रगतिशील लोग टीका-टिप्पणी करते हैं, और उन्होंने खुद भी ऐसे कई टिप्पणियों का सामना किया है।