बागपत। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि खाप पंचायतें और उनके चौधरी जो भी निर्णय लेते हैं, वे समाज और देश के व्यापक हित को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। उन्होंने साफ कहा कि जब तक सामाजिक बुराइयों को जड़ से समाप्त नहीं किया जाएगा, तब तक समाज की वास्तविक प्रगति संभव नहीं है।

दोघट कस्बे में भाकियू नेता राजेंद्र चौधरी के आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए नरेश टिकैत ने युवा पीढ़ी पर विशेष चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युवाओं को संस्कारवान बनाना समय की आवश्यकता है और नशाखोरी जैसी आदतों से उन्हें दूर रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बड़ौत क्षेत्र में खाप चौधरियों द्वारा लिए गए निर्णयों का समर्थन करते हुए कहा कि बच्चों का पहनावा सभ्य और सुसंस्कृत होना चाहिए, ताकि उनमें अनुशासन और आत्मविश्वास दोनों विकसित हो सकें।

मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताते हुए टिकैत ने कहा कि बच्चों को मोबाइल का प्रयोग केवल जरूरत के अनुसार और घर की सीमाओं में ही करना चाहिए। सार्वजनिक स्थानों या वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल न केवल अनुचित है, बल्कि जानलेवा भी हो सकता है। उन्होंने सलाह दी कि मोबाइल का सीमित उपयोग ही बेहतर है।

गन्ना मूल्य को लेकर किसानों की समस्याओं पर बोलते हुए नरेश टिकैत ने कहा कि सरकार द्वारा घोषित बढ़ोतरी में किसानों को वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 30 रुपये बढ़ोतरी का प्रचार किया जा रहा है, जबकि किसानों को हकीकत में 27 रुपये ही मिल रहे हैं। भाड़े में तीन रुपये की बढ़ोतरी को भी उन्होंने अनुचित बताया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों की समस्याओं का समाधान धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम या आंदोलन से नहीं, बल्कि सरकार और किसानों के बीच सार्थक बातचीत से होना चाहिए। ऐसे आंदोलनों से आम लोग ही परेशान होते हैं। सरकार को किसानों की पीड़ा समझते हुए संवाद के रास्ते से समाधान निकालना चाहिए।

तीन दिन तक चीनी मिलों को गन्ना न देने के किसानों के निर्णय पर टिकैत ने कहा कि यदि किसान सर्वसम्मति से ऐसे फैसले लेते हैं, तो अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के कदम उठाए जा सकते हैं।