लखनऊ। राजधानी में एक छोटे से जमीन विवाद का मामला लगभग पांच दशक तक अदालतों में चलता रहा। महज 180 रुपये में खरीदी गई जमीन के लिए शुरू हुई कानूनी लड़ाई 47 साल बाद खत्म हुई। दिसंबर 2025 में अदालत का फैसला आने के बाद भी जमीन पर वास्तविक कब्जा मिलने में करीब तीन महीने लग गए। इस पूरे मामले में वादी पक्ष को करीब 16 लाख रुपये खर्च करने पड़े, जबकि मुकदमे के दौरान वादी और प्रतिवादी दोनों का निधन हो चुका है।

गोसाईंगंज क्षेत्र के बस्तिया गांव निवासी ब्रजेश वर्मा के अनुसार, उनके पिता स्वर्गीय राम सागर ने 16 सितंबर 1965 को पड़ोस में रहने वाली शिवरानी के साथ मिलकर तीन बिस्वा जमीन खरीदी थी। इसमें राम सागर का हिस्सा करीब पौने दो बिस्वा था, जिसके लिए उन्होंने 180 रुपये चुकाए थे।

फर्जीवाड़े से शुरू हुआ विवाद

मामला तब उलझ गया जब 9 मार्च 1973 को शिवरानी ने कथित तौर पर धोखाधड़ी करते हुए राम सागर की जगह किसी अन्य व्यक्ति को प्रस्तुत कर उनके हिस्से की जमीन अपने नाम दर्ज करा ली। यह मामला वर्षों तक छिपा रहा, लेकिन बाद में इस फर्जीवाड़े में शामिल एक गवाह का शिवरानी से विवाद हो गया। इसी के बाद वर्ष 1977 में उसने राम सागर को पूरी सच्चाई बताई।

1978 में शुरू हुई कानूनी लड़ाई

सच्चाई सामने आने के बाद राम सागर ने रजिस्ट्री कार्यालय में जांच कराई, जिसमें धोखाधड़ी की पुष्टि हुई। इसके बाद उन्होंने 1978 में गोसाईंगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराकर न्याय के लिए मुकदमा शुरू किया।

पीढ़ी दर पीढ़ी चली लड़ाई

मुकदमा वर्षों तक चलता रहा और 2003 में राम सागर का निधन हो गया। इसके बाद उनके बेटे ब्रजेश वर्मा ने यह कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाई। इसी दौरान 2013 में प्रतिवादी शिवरानी की भी मृत्यु हो गई, लेकिन मामला उनके वारिसों के साथ जारी रहा।

47 साल बाद आया फैसला

लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर दिसंबर 2025 में विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट-2) एवं अपर जिला जज सत्येंद्र सिंह ने ब्रजेश वर्मा के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने शिवरानी द्वारा कराई गई फर्जी रजिस्ट्री को निरस्त कर दिया।

तीन महीने बाद मिला कब्जा

अदालती फैसले के बाद जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में भी समय लगा और करीब तीन महीने बाद ब्रजेश वर्मा को जमीन पर कब्जा मिल सका।

ब्रजेश के मुताबिक यह लड़ाई सिर्फ जमीन हासिल करने की नहीं थी, बल्कि उनके पिता के सम्मान और न्याय की थी, जिसे आखिरकार उन्होंने हासिल कर लिया।