मुजफ्फरनगर। गुरुवार को मुजफ्फरनगर में उस समय प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई, जब भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक उमेश मलिक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय पहुंचे और एक शिक्षिका से जुड़े मामले को लेकर अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। बीएसए कार्यालय में हुई तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही मामला चर्चा का विषय बन गया और राजनीतिक रंग लेने लगा।
बुढ़ाना विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक रह चुके उमेश मलिक गुरुवार को सर्कुलर रोड स्थित बीएसए कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने एक सहायक अध्यापिका के प्रकरण को लेकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप कुमार पर लापरवाही और मनमानी का आरोप लगाया। कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों के समक्ष पूर्व विधायक ने कड़े शब्दों में अपनी आपत्ति दर्ज कराई। बताया गया कि मामला एक सहायक अध्यापिका के शैक्षणिक व विभागीय दस्तावेजों से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि आवश्यक अनुभव प्रमाण पत्र की विभागीय रिपोर्ट पर बीएसए द्वारा काउंटर साइन न किए जाने के कारण संबंधित अध्यापिका का प्रधानाध्यापक पद पर समायोजन अटका हुआ है। इस कारण वह बीते करीब दो माह से लगातार विभागीय कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर है।
बीएसए कार्यालय में हुई बहस का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो में पूर्व विधायक उमेश मलिक बीएसए संदीप कुमार पर कार्य में लापरवाही बरतने और अनावश्यक देरी करने का आरोप लगाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में उन्होंने यह भी कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वह इस स्थिति को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। उनके आक्रोशित तेवरों से कार्यालय में मौजूद कर्मचारी असहज नजर आए। पूर्व विधायक का आरोप है कि जानबूझकर अध्यापिका को परेशान किया जा रहा है और उसके करियर के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने कहा कि संबंधित अध्यापिका लखनऊ में काउंसलिंग प्रक्रिया में चयनित हो चुकी है, लेकिन जिला स्तर पर स्वीकृति न मिलने के कारण नियुक्ति आदेश जारी नहीं हो पा रहा है।
घटना के बाद जाट कॉलोनी स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में पूर्व विधायक उमेश मलिक ने पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संबंधित अध्यापिका मूल रूप से ककरौली की निवासी है और उसका विवाह तेवड़ा गांव में हुआ है। वह वर्ष 2012 से न्यू आर्य पब्लिक जूनियर हाईस्कूल, मोरना में सहायक अध्यापिका के पद पर कार्यरत रही है और बाद में प्रधानाध्यापक के रूप में भी सेवाएं दे चुकी है। हाल ही में लखनऊ में आयोजित काउंसलिंग में सहायक अध्यापक से प्रधानाध्यापक पद पर समायोजन के लिए उसका चयन हुआ था। लखनऊ से निर्देश दिए गए थे कि जिला स्तर पर आवश्यक विभागीय औपचारिकताएं पूरी कर दस्तावेज भेजे जाएं, जिसके बाद आदेश निर्गत किया जाएगा।
पूर्व विधायक का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन की ओर से अनुभव प्रमाण पत्र संबंधी रिपोर्ट एबीएसए को भेज दी गई थी, लेकिन उस पर बीएसए के काउंटर साइन आवश्यक थे। उनका कहना है कि बीएसए ने किसी स्पष्ट गाइडलाइन का हवाला देकर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। उमेश मलिक ने आरोप लगाया कि योग्यता और चयन के बावजूद अध्यापिका का भविष्य अनावश्यक रूप से रोका जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से चयनित यह एकमात्र अध्यापिका है, फिर भी उसके साथ भेदभाव किया जा रहा है। पूर्व विधायक ने चेतावनी दी कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो वह इस मामले को शासन स्तर और मुख्यमंत्री तक उठाएंगे।