मुजफ्फरनगर। जिले में 9 मई को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लंबित मामलों और विभिन्न प्रकार के विवादों का आपसी सहमति के आधार पर त्वरित निस्तारण किया जाएगा। इस प्रक्रिया में लोगों को न तो लंबी कानूनी कार्यवाही से गुजरना पड़ेगा और न ही किसी प्रकार का शुल्क देना होगा।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) डॉ. सत्येंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि लोक अदालत आम नागरिकों के लिए सस्ता, सरल और शीघ्र न्याय पाने का प्रभावी माध्यम है। इसमें दोनों पक्ष आपसी समझौते से विवाद खत्म कर सकते हैं और उसी दिन निर्णय भी प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि लोक अदालत में मामलों के निपटारे के लिए कोई फीस नहीं ली जाती। यदि कोई मामला पहले से न्यायालय में विचाराधीन है और लोक अदालत में उसका समाधान हो जाता है, तो जमा कोर्ट फीस भी वापस कर दी जाती है।
इस विशेष लोक अदालत में पारिवारिक विवाद, पति-पत्नी के मामले, चेक बाउंस, बैंक ऋण, सड़क दुर्घटना मुआवजा, बिजली-पानी बिल विवाद, किरायेदारी विवाद और वाहन चालान जैसे मामलों का निस्तारण किया जाएगा।
प्राधिकरण के अनुसार, लोक अदालत के निर्णय को अंतिम माना जाता है और इसके खिलाफ अपील का प्रावधान नहीं होता। इससे लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों से राहत मिलती है।
डॉ. चौधरी ने कहा कि लोक अदालत समय और धन दोनों की बचत करती है, साथ ही रिश्तों में तनाव भी कम करती है। उन्होंने जिले के लोगों से अपील की कि वे 9 मई को आयोजित लोक अदालत में पहुंचकर अपने विवादों का समाधान कराएं और कानूनी परेशानियों से राहत पाएं।