मुजफ्फरनगर पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े रैकेट का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये लोग ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आसान लोन दिलाने का झांसा देकर उनके बैंक खाते खुलवाते थे और बाद में उन्हीं खातों का इस्तेमाल देशभर में हो रही ऑनलाइन धोखाधड़ी में किया जाता था।

एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि इस पूरे मामले की शुरुआत एक महिला की शिकायत से हुई थी, जिसने सिविल लाइन थाने में आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उसे कम ब्याज और सरल शर्तों पर लोन दिलाने का लालच देकर बैंक ऑफ महाराष्ट्र में खाता खुलवाया। इसके बाद आरोपियों ने उससे एटीएम कार्ड, पासबुक और चेकबुक अपने पास रख ली। काफी समय बाद भी जब लोन नहीं मिला तो उसे शक हुआ और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।'


जांच में सामने आया कि महिला के खाते का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड से जुड़े लेन-देन में किया गया था, जिसमें लाखों रुपये का संदिग्ध ट्रांजेक्शन हुआ। इसके बाद पुलिस ने पूरे नेटवर्क की तहकीकात शुरू की और पाया कि इसी तरह कई अन्य लोगों के खाते भी गिरोह के कब्जे में हैं।

एसएसपी के निर्देश पर गठित टीम ने तकनीकी सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और सूचना तंत्र की मदद से मॉल रोड के पास दबिश देकर चारों आरोपियों को पकड़ लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आर्यन तोमर उर्फ शुभम (बड़ौत, बागपत), बादल राणा (दोघट, बागपत), आशू त्यागी और नवनीत त्यागी (धनौरा मंडी, अमरोहा) के रूप में हुई है।


पुलिस ने इनके पास से 7 एटीएम कार्ड, 4 फर्जी आधार कार्ड, कई बैंक पासबुक, मोबाइल फोन और एक कार बरामद की है। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे लोगों को करीब तीन हजार रुपये देकर उनके बैंक दस्तावेज हासिल करते थे और फिर इन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचाते थे, जो इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी में करते थे।

फिलहाल पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इसके पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा जा रहा है।