मुजफ्फरनगर। शहर के गांधी कॉलोनी क्षेत्र में बिजली संकट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर तक पहुंच गया है। बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद हुए विरोध प्रदर्शन और उसके बाद दर्ज कराई गई एफआईआर को लेकर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार और ऊर्जा निगम आमने-सामने नजर आए।

जानकारी के मुताबिक, गांधी कॉलोनी और सुभाष नगर क्षेत्र में शुक्रवार देर रात करीब 1:30 बजे 400 केवीए ट्रांसफार्मर में तकनीकी खराबी आने से बिजली आपूर्ति ठप हो गई। भीषण गर्मी के बीच करीब 20 से 30 घंटे तक बिजली नहीं आने से स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी फैल गई। शनिवार सुबह नया ट्रांसफार्मर लगाया गया, लेकिन बिजली बहाल करने के दौरान मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

ऊर्जा निगम का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान लाइनमैन को रोक लिया गया और गांधी वाटिका फीडर की आपूर्ति भी प्रभावित हुई। इसके बाद अवर अभियंता तकनीकी रमनजीत सिंह ने नई मंडी कोतवाली में तहरीर देकर मोनू, आशु बालियान और अभिषेक त्यागी समेत 15 से 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, कर्मचारी को रोकने और अन्य धाराओं में कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

एफआईआर की जानकारी मिलने पर प्रदर्शनकारी कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार से मिले और पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। इसके बाद मंत्री ने मुख्य अभियंता विनोद कुमार गुप्ता से फोन पर बातचीत करते हुए मुकदमा दर्ज कराने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि बिजली संकट से परेशान लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई उचित नहीं है और विभाग को इस मामले में संयम बरतना चाहिए। मंत्री ने ट्रांसफार्मर बदलने में हुई देरी पर भी सवाल उठाते हुए चेतावनी दी कि यदि मुकदमा वापस नहीं लिया गया तो उन्हें स्वयं विभागीय कार्यालय पहुंचना पड़ेगा।

मंत्री ने जिलाधिकारी उमेश मिश्रा से भी फोन पर बातचीत की। वायरल वीडियो में उन्हें यह कहते सुना जा सकता है कि भीषण गर्मी में घंटों बिजली गुल रहने पर लोगों का विरोध करना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है तो उसके समर्थन में ठोस साक्ष्य होने चाहिए।

उधर, मुख्य अभियंता विनोद कुमार गुप्ता ने विभागीय कर्मचारियों का पक्ष लेते हुए कहा कि भीषण गर्मी में कर्मचारी लगातार काम कर रहे हैं और उनके साथ किसी तरह की अभद्रता या बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए विभाग पूरी मजबूती से खड़ा रहेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नियमों के पालन के मामले में पीछे हटना उनकी कार्यशैली का हिस्सा नहीं है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद शहर में बिजली व्यवस्था, विभागीय कार्रवाई और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।