राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आगामी 6 जुलाई को होने वाली बैठक को लेकर हलचल तेज हो गई है। इस बैठक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसमें ट्रस्ट के भीतर चल रहे विवाद और प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर अहम फैसले लिए जा सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की संभावना है। दोनों से इस पूरे प्रकरण पर लिखित और मौखिक जवाब मांगा जाएगा, ताकि उनका पक्ष औपचारिक रूप से रिकॉर्ड में शामिल किया जा सके। इसके बाद ही ट्रस्ट अपने नियमों और बायलॉज के अनुसार आगे की कार्रवाई तय करेगा।
ट्रस्ट से जुड़े जानकारों का कहना है कि किसी भी पदाधिकारी पर सीधे कार्रवाई करने से पहले प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होता है। पहले संबंधित व्यक्ति को नोटिस दिया जाता है, फिर उसका जवाब सुना जाता है और उसी के आधार पर आगे निर्णय लिया जाता है। यदि बैठक में इस्तीफे या पद से हटाने का कोई प्रस्ताव आता है, तो उस पर भी निर्धारित बहुमत के आधार पर ही फैसला होगा।
यह भी उल्लेखनीय है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 5 फरवरी 2020 को संसद में की गई घोषणा के बाद किया गया था। इस ट्रस्ट को राम मंदिर निर्माण, प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े सभी निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है।
ट्रस्ट के नियमों के अनुसार किसी भी बड़े निर्णय के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है। पदाधिकारियों से पहले स्पष्टीकरण लेना अनिवार्य है और उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जाती है। ट्रस्ट को मंदिर निर्माण और उससे जुड़े सभी वित्तीय मामलों के संचालन की स्वतंत्रता है, लेकिन आय-व्यय का नियमित ऑडिट और पारदर्शिता बनाए रखना भी आवश्यक है। ट्रस्ट की संपत्तियों की बिक्री पर रोक है और किसी भी ट्रस्टी को वेतन नहीं दिया जाता, केवल आधिकारिक कार्यों का खर्च वहन किया जाता है।
अब सभी की निगाहें 6 जुलाई की बैठक पर हैं, जहां इस पूरे मामले में ट्रस्ट की अगली रणनीति और निर्णय सामने आ सकते हैं।