सहारनपुर: शिवसेना में हाल ही में हुई टूट को लेकर कांग्रेस सांसद Imran Masood ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के लिए विपक्षी दलों को लगातार विभाजित करने, दबाव में लेने और डराने की कोशिशें की जा रही हैं। साथ ही उन्होंने दल बदलने वाले जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक नैतिकता पर भी सवाल उठाए।
‘विचारधारा छोड़ने पर पद छोड़ना चाहिए’
इमरान मसूद ने कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि उस विचारधारा और दल को छोड़ना चाहता है, जिसके आधार पर जनता ने उसे चुना है, तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुसार यह सबसे बुनियादी नैतिक जिम्मेदारी है।
जांच एजेंसियों के दबाव का आरोप
कांग्रेस सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि कई नेताओं के राजनीतिक निर्णयों पर जांच एजेंसियों के दबाव का असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जैसी एजेंसियों का भय कुछ जनप्रतिनिधियों के फैसलों को प्रभावित करता है।
लोकतंत्र पर चिंता
इमरान मसूद के अनुसार, विपक्षी दलों को कमजोर करने की कोशिशें लगातार जारी हैं, जो लोकतंत्र के लिए सही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एक मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सशक्त और स्वतंत्र विपक्ष का होना जरूरी है, और उसे कमजोर करने का प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।