शामली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक विवादित भूमि मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कॉलोनाइजर ठेकेदार धर्मवीर, तत्कालीन हल्का लेखपाल अशोक कुमार और विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी सुरेश कुमार सोनी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने तीनों को सेवा में गंभीर लापरवाही और अनियमितताओं का दोषी माना है।
यह मामला कस्बा बनत के मोहल्ला पटेल नगर निवासी विनोद कुमार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। परिवाद 24 नवंबर 2020 को दायर किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि धर्मवीर ने खसरा संख्या 1115, मौजा बनत प्रथम की भूमि पर बिना अनुमति कॉलोनी विकसित कर प्लॉट बेच दिए। शिकायत में तहसीलदार शामली, हल्का लेखपाल और विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी को भी पक्षकार बनाया गया था।
परिवादी के अनुसार, उन्होंने इसी कॉलोनी में एक प्लॉट खरीदकर मकान बनवाया था। बाद में राष्ट्रीय राजमार्ग 709-बी (दिल्ली–यमुनोत्री मार्ग) परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण हुआ, जिसमें उनके मकान का एक हिस्सा और रास्ता प्रभावित हुआ। आरोप है कि मुआवजे की राशि हड़पने के इरादे से हल्का लेखपाल ने गलत रिपोर्ट तैयार की और 270 वर्गमीटर भूमि पर धर्मवीर को मालिक और काबिज दर्शाते हुए विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के कार्यालय में प्रतिकर फाइल भेज दी।
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने मामले की सुनवाई के बाद शिकायत को स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि धर्मवीर के खाते में अवैध रूप से स्थानांतरित की गई 10 लाख 4 हजार 276 रुपये की राशि वसूल कर परिवादी और अन्य सहखातेदारों को उनके हिस्से के अनुसार नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित भुगतान किया जाए।
इसके अलावा आयोग ने तत्कालीन हल्का लेखपाल अशोक कुमार और विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी सुरेश कुमार सोनी पर भ्रष्टाचार, सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और आपराधिक न्यास भंग जैसे गंभीर आरोपों को देखते हुए भारत सरकार के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (राजस्व विभाग) की आर्थिक अपराध शाखा, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को जांच के लिए पत्र भेजने के निर्देश दिए हैं। संबंधित एजेंसियों को जांच कर रिपोर्ट आयोग में प्रस्तुत करने को कहा गया है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि तीनों आरोपियों द्वारा सेवा में कमी, उपेक्षा और लापरवाही बरतने के कारण उन पर संयुक्त रूप से एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है, जिसे नियमानुसार सरकारी राजकोष में जमा कराया जाएगा।