नई दिल्ली। नोएडा के सेक्टर-126 पुलिस थाने में महिला वकील से कथित हिरासत में यौन उत्पीड़न और अवैध नजरबंदी के गंभीर आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने पुलिस आयुक्त को स्पष्ट निर्देश दिया कि मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज को न तो हटाया जाए और न ही नष्ट किया जाए। अदालत ने आदेश दिया कि फुटेज को सीलबंद कवर में सुरक्षित रखा जाए।
अगली सुनवाई 7 जनवरी को
हालांकि अदालत ने शुरुआत में याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी, लेकिन आरोपों की गंभीरता और सीसीटीवी से जुड़े मुद्दों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीधे सुनवाई का निर्णय लिया। मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी को होगी। सुनवाई के दौरान महिला वकील की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया, जिस पर पीठ ने कहा कि अदालत के आदेश के बाद कोई उन्हें नुकसान पहुंचाने की हिम्मत नहीं करेगा।
वरिष्ठ वकील ने बताया ‘बेहद गंभीर मामला’
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने इसे “बेहद गंभीर और शर्मनाक” मामला बताया। उन्होंने कहा कि यदि दिल्ली से सटे नोएडा में इस तरह की घटना हो सकती है, तो देश के अन्य हिस्सों की स्थिति की कल्पना करना कठिन नहीं है।
SIT या CBI जांच की मांग
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इसे विशेष जांच दल (SIT) या सीबीआई को सौंपा जाए।
14 घंटे की हिरासत और उत्पीड़न का आरोप
महिला वकील ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि 3 दिसंबर की रात, मुवक्किल की ओर से कानूनी जिम्मेदारी निभाते समय, उन्हें लगभग 14 घंटे तक अवैध हिरासत में रखा गया। इस दौरान उनके साथ कथित रूप से यौन उत्पीड़न, शारीरिक हिंसा और मानसिक दबाव डाला गया।
CCTV बंद करने का आरोप
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि घटना के समय पुलिस स्टेशन के CCTV कैमरे जानबूझकर बंद या हटा दिए गए, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। साथ ही आरोप लगाया गया कि पुलिस अधिकारियों ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार किया और पीड़िता को धमकियां दी गईं।