लखनऊ। विद्युत नियामक आयोग की इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड रिव्यू पैनल की बैठक बुधवार को आयोजित हुई, जिसमें पावर कार्पोरेशन और विद्युत उपभोक्ता परिषद ने अपने तर्क रखे। अब मामला आयोग के समक्ष है और उम्मीद जताई जा रही है कि जनवरी में नई कॉस्ट डाटा बुक जारी कर दी जाएगी। इसमें स्मार्ट प्रीपेड मीटर की दरों के साथ-साथ नए कनेक्शन की दरों को भी अंतिम रूप दिया जाएगा। इससे अभियंताओं द्वारा “इस्टीमेट” के नाम पर उपभोक्ताओं का शोषण रोकने में मदद मिलेगी।

बैठक की अध्यक्षता आयोग अध्यक्ष अरविंद कुमार ने की, जबकि सदस्य संजय सिंह मौजूद थे। बैठक में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल, प्रबंध निदेशक पंकज कुमार, उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, मध्यांचल प्रबंध निदेशक रिया केजरीवाल, टोरेंट पावर और नोएडा पावर कंपनी के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. गोयल ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर की दरें तय करने की मांग की। प्रबंध निदेशक पंकज कुमार ने बताया कि आयोग ने सिंगल फेस मीटर के लिए 2,800 रुपये और थ्री फेज मीटर के लिए 4,100 रुपये प्रस्तावित किए हैं, जो अन्य राज्यों की तुलना में कम हैं। असम, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में स्मार्ट मीटर की कीमत 5,200 से 6,325 रुपये के बीच है।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि केवल मीटर की लागत पर ध्यान देना चाहिए। पैनल ने सुझाव दिया कि राजस्थान में सिंगल फेस मीटर 2,500 रुपये और थ्री फेज 3,500 रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके अलावा उपभोक्ता परिषद ने ग्रामीण महिलाओं को नए कनेक्शन पर 33% और शहरी महिलाओं को 15% छूट देने की भी मांग की।

बैठक में ट्रांसफार्मर और अन्य उपकरणों की लागत पर भी चर्चा हुई। प्रस्तावित दरें इस प्रकार हैं:

  • 25 केवीए ट्रांसफार्मर: 73,101 – 86,157 रुपये

  • 250 केवीए ट्रांसफार्मर: 5,56,990 – 6,51,984 रुपये

  • 11 केवी केबल: 1,173 – 1,271 रुपये प्रति मीटर

  • 8.5 मीटर पीसीसी पोल: 2,435 – 3,012 रुपये

उपभोक्ता हितों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जैसे कि 150 किलोवाट / 300 मीटर की एकमुश्त कनेक्शन सुविधा केवल इलेक्ट्रिफाइड एरिया तक सीमित न की जाए, दो कनेक्शन की सीमा 40 मीटर के बाद हटाई जाए और घरेलू उपभोक्ताओं की 5 किलोवाट तक की सिक्योरिटी व प्रोसेसिंग फीस बढ़ाई न जाए।

बैठक में सभी पक्षों ने सहमति व्यक्त की कि नई कॉस्ट डाटा बुक से उपभोक्ताओं पर अनावश्यक वित्तीय बोझ न पड़े और पारदर्शी मूल्य निर्धारण सुनिश्चित किया जाए।