दिल्ली के द्वारका में हाल ही में हुए सड़क हादसे में 23 वर्षीय साहिल धननेश्रा की मौत ने एक बार फिर भारत में सड़क सुरक्षा की गंभीर स्थिति को उजागर किया है। तेज रफ्तार SUV से टकराकर जान गंवाने वाले साहिल की कहानी कोई अपवाद नहीं है, बल्कि उन हजारों दुर्घटनाओं की झलक है जो हर दिन देश भर की सड़कों पर होती हैं, लेकिन लंबे समय तक चर्चा में नहीं रहतीं।

दोपहिया वाहन – सबसे अधिक जोखिम में

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत में सड़क हादसों में सबसे ज्यादा दोपहिया वाहन शामिल हैं:

  • 2024 में दो-पहिया वाहन 2.31 लाख दुर्घटनाओं में शामिल रहे

  • कार, टैक्सी और वैन से जुड़े हादसे 67,988 दर्ज हुए

  • पैदल यात्रियों से जुड़े हादसों की संख्या 94,780 रही

ये आंकड़े केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 12 फरवरी, 2026 को लोकसभा में पेश किए।

क्यों हैं दोपहिया वाहन सबसे आम?

  • दोपहिया वाहन भारत में सबसे सुलभ और किफायती परिवहन साधन हैं

  • शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में रोज लाखों लोग बाइक और स्कूटर पर निर्भर हैं

  • देश में कुल पंजीकृत वाहनों की संख्या 25 करोड़ से अधिक है, जिनमें लगभग 75% दोपहिया वाहन हैं

दोपहिया सवार क्यों ज्यादा असुरक्षित हैं?

  • कारों की तरह दोपहिया वाहनों में सुरक्षा कवच नहीं होता

  • टक्कर के समय सवार सीधे प्रभाव की चपेट में आते हैं

  • हल्का सा हादसा भी गंभीर चोट या मृत्यु का कारण बन सकता है

तेज रफ्तार – मुख्य वजह

द्वारका हादसे की शुरुआती जांच में SUV की अत्यधिक गति सामने आई। राष्ट्रीय स्तर पर ओवरस्पीडिंग सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण है।

  • 2023 में ओवरस्पीडिंग से 2.84 लाख दुर्घटनाएं हुईं

  • खतरनाक ड्राइविंग और गलत ओवरटेकिंग से जुड़े हादसे 1.1 लाख रहे

  • मौसम, सड़क पर जानवर, तकनीकी खराबी या थकान जैसी वजहें अपेक्षाकृत कम रही

मौत का आंकड़ा कितना गंभीर है?

  • 2023 में सड़क हादसों में हुई कुल मौतों में 44.8% दोपहिया सवार थे

  • पैदल यात्रियों का हिस्सा 20.4% रहा

  • कार सवारों की मौत का अनुपात 12.4% था

सड़क सुरक्षा की असमान चुनौती

आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि सड़क सुरक्षा का संकट सभी वर्गों पर समान नहीं है। दोपहिया सवार और पैदल यात्री सबसे असुरक्षित समूह हैं। तेज रफ्तार, कमजोर प्रवर्तन, सड़क डिज़ाइन और ड्राइविंग व्यवहार मिलकर खतरे को बढ़ाते हैं।

राष्ट्रीय स्तर की समस्या

द्वारका हादसा कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह भारत में सड़क सुरक्षा की व्यापक समस्या को दर्शाता है। जब तक दोपहिया सवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, सड़क हादसों और मौतों के आंकड़े घटाना मुश्किल रहेगा।