योगी के 'टोंटी वाले' तंज पर अखिलेश यादव का पलटवार, बोले- सीएम यानी 'करप्ट माउथ'

HIGHLIGHTS
- अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तीखा पलटवार किया है।
- उन्होंने अपने पोस्ट में विज्ञान और मनोविज्ञान का हवाला देते हुए कहा कि किशोरावस्था के अनुभव और आदतें व्यक्ति के सोचने, बोलने और व्यवहार करने के तरीके पर असर डालती हैं।
- अपने बयान में उन्होंने यह भी दावा किया कि शुरुआती जीवन के संस्कार और परिस्थितियाँ सार्वजनिक जीवन में भी किसी व्यक्ति की भाषा और शैली में दिखाई दे सकती हैं।
- इसी संदर्भ में उन्होंने मुख्यमंत्री की…
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने अपने पोस्ट में विज्ञान और मनोविज्ञान का हवाला देते हुए कहा कि किशोरावस्था के अनुभव और आदतें व्यक्ति के सोचने, बोलने और व्यवहार करने के तरीके पर असर डालती हैं।
अपने बयान में उन्होंने यह भी दावा किया कि शुरुआती जीवन के संस्कार और परिस्थितियाँ सार्वजनिक जीवन में भी किसी व्यक्ति की भाषा और शैली में दिखाई दे सकती हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने मुख्यमंत्री की भाषा शैली पर टिप्पणी करते हुए कुछ राजनीतिक संकेत भी दिए।
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में मुख्यमंत्री के शुरुआती जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर भी कई सवाल उठाए। मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए उन्होंने यह उल्लेख किया कि योगी आदित्यनाथ (अजय सिंह बिष्ट) का शुरुआती जुड़ाव पारिवारिक व्यवसाय से रहा और बाद में वे धार्मिक जीवन से जुड़े।
उन्होंने यह भी पूछा कि गोरखनाथ मठ में उत्तराधिकार की प्रक्रिया किस आधार पर तय की गई थी और क्या उसमें किसी प्रकार की औपचारिक चयन व्यवस्था थी। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि सार्वजनिक जीवन में तेजी से मिली जिम्मेदारियों के पीछे योग्यता के अलावा अन्य कारण भी थे या नहीं।
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में आगे कहा कि पद और पहचान समय के साथ मिल सकते हैं, लेकिन भाषा और व्यवहार व्यक्ति के व्यक्तित्व को दर्शाते हैं।
इससे पहले विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना किसी का नाम लिए जल संरक्षण और नल कनेक्शन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर टिप्पणी की थी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा था कि कुछ लोग योजनाओं में लापरवाही करते हैं और संसाधनों के उपयोग में सावधानी नहीं बरतते।
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